कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई? जिन्होंने 40 सालों तक संभाला ईरान के सुप्रीम लीडर का पद

ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला खामेनेई का आज निधन हो गया. ईरानी मीडिया ने इसके बारे में पुष्टि करते हुए देश में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.

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Shanu Sharma

ईरान के सुप्रीम लीडर, उन्होंने अपने देश पर तीन दशकों से भी ज्यादा समय तक राज किया. ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के राजनीतिक और सैन्य शक्तियों को आकार देने वाले अयातुल्ला अली खामेनेई का आज निधन हो गया. मिल रही जानकारी के मुताबिक 86 साल की उम्र उन्होंने अंतिम सांस ली.

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से जंग जारी था. इसी बीच अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया कि इजरायल के सपोर्ट से हमने ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई को मार गिराया है. 

कौन हैं अयातुल्ला अली खामेनेई?

मिडिल ईस्ट में सबसे लंबे समय तक राज करने वाले नेताओं के बारे में अगर जिक्र किया जाएगा तो खामेनेई का नाम शायद सबसे ऊपर रहेगा. ईरान में 1989 में 50 साल की उम्र में उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया. जिसके बाद से उन्होंने अपने मृत्यु तक इस पद को संभाला. अगर उनके जन्म के बारे में बात करें तो खामेनेई का जन्म जन्म जुलाई 1939 में उत्तर-पूर्वी ईरान के मशहद शहर में हुआ था. उनका परिवार काफी धार्मिक था, जिसकी वजह से वह भी बचपन से ही धार्मिक रहें. उन्होंने अपनी पढ़ाई भी एक धार्मिक स्कूल से ही की. इसके बाद उन्होंने युवा मौलवी के रूप में शपथ लिया. इस दौरान उन्होंने ईरान के US-समर्थित शासक, शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी का कड़ा विरोध किया. हालांकि राजनीतिक सक्रियता की वजह से उन्हें कई बार गिरफ्तार भी किया गया था. 

अमेरिका और ईरान के बीच कैसे बढ़ा तनाव?

ईरान में 1979 के दौरान इस्लामिक क्रांति को रूहोल्लाह खोमैनी द्वारा लीड किया जा रहा था. इस समय अयातुल्ला अली खामेनेई भी रूहोल्लाह के करीबी थे. इस क्रांति के बाद ही रूहोल्लाह खोमैनी को ईरान का पहला सुप्रीम लीडर बनाया गया. 1989 में रूहोल्लाह निधन के बाद खामेनेई को इस पद की जिम्मेदारी दी गई. सुप्रीम लीडर बनने से पहले, खामेनेई ईरान के प्रेसिडेंट के पद पर थे. खामेनेई ने ईरान के मिलिट्री और कोर्ट में अपना कंट्रोल मजबूत किया और उनके ही राज में ईरान एक मिलिट्री डिक्टेटरशिप जैसा बन गया.

अमेरिका के साथ न्यूक्लियर टॉक का मामला तब शुरू हुआ जब 2013 में, खामेनेई ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में यूनाइटेड स्टेट्स के साथ सीक्रेट बातचीत को मंजूर किया. इन बातचीत से 2015 का न्यूक्लियर एग्रीमेंट हुआ, जिसे ऑफिशियली जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन के नाम से जाना जाता है. हालांकि माना जाता है कि खामेनेई को अमेरिका पर कभी भी भरोसा नहीं था. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका को इस डील से साइड कर लिया. जहां दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया. जिसका नतीजा यह हुआ कि आज खामेनेई का निधन हो गया.