प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने अमेरिका गए हैं. यह सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की मेजबानी में आयोजित हुआ. पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद जो बाइडेन ने ट्वीट किया. उन्होंने कहा कि भारत के साथ अमेरिका की साझेदारी इतिहास में किसी भी समय की तुलना में सबसे अधिक मजबूत है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज क्वाड शिखर सम्मेलन के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की. बाइडेन ने अपने आवास पर पीएम मोदी का स्वागत किया, जहां दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया. बाइडेन ने पीएम मोदी का हाथ पकड़कर उन्हें घर के अंदर ले गए. राष्ट्रपति बिडेन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत के साथ अमेरिका की साझेदारी इतिहास में किसी भी समय की तुलना में अधिक मजबूत, घनिष्ठ और अधिक गतिशील है. प्रधानमंत्री मोदी, जब भी हम बैठते हैं, मैं सहयोग के नए क्षेत्रों को खोजने की हमारी क्षमता से प्रभावित होता हूं. आज भी कुछ अलग नहीं था.
US President Joe Biden tweets, "The United States' partnership with India is stronger, closer, and more dynamic than any time in history. Prime Minister Modi, each time we sit down, I'm struck by our ability to find new areas of cooperation. Today was no different." pic.twitter.com/XXHiRVTQsv
— ANI (@ANI) September 21, 2024Also Read
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा में विदेश मंत्री एस जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा भी शामिल हैं. अमेरिकी दल में विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए राष्ट्रपति के सहायक टीएच जेक सुलिवन और भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी शामिल हैं. तीन दिवसीय यात्रा पर गए पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानी और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे, जो क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए अमेरिका में हैं.
राष्ट्रपति बिडेन द्वारा अपने गृहनगर विलमिंगटन में आयोजित किए जा रहे वार्षिक क्वाड शिखर सम्मेलन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने और यूक्रेन और गाजा में संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने के तरीकों का पता लगाने के लिए कई नई पहल शुरू किए जाने की उम्मीद है. चार सदस्यीय क्वाड या चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने की वकालत करती है. बीजिंग इसे चीन विरोधी समूह के रूप में देखता है.