नई दिल्ली: अमेरिका में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बावजूद एक नया खतरनाक ड्रग तेजी से फैल रहा है, जिसे पिंक कोकीन या तुसी कहा जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ड्रग्स के खिलाफ अभियान तेज है, फिर भी यह नया नशा क्लबों और पार्टियों में लोकप्रिय हो गया है.
पिंक कोकीन का नाम भले ही कोकीन जैसा हो, लेकिन असल में यह कोकीन नहीं है. यह कई खतरनाक नशीले पदार्थों का मिश्रण होता है, जिसे कॉकटेल ड्रग कहा जाता है. इसमें मुख्य रूप से केटामाइन (डिसोसिएटिव) और एमडीएमए (एक्सटेसी) मिलाए जाते हैं.
कई मामलों में इसमें मेथामफेटामाइन, ओपिओइड्स और फेंटानिल जैसे जानलेवा तत्व भी पाए गए हैं. इसे आकर्षक बनाने के लिए गुलाबी फूड कलर मिलाया जाता है, जिससे युवा इसे कम खतरनाक समझ लेते हैं. असल खतरा यह है कि इसका हर बैच अलग होता है और इसकी ताकत का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है.
ओवरडोज होने पर व्यक्ति की सांस रुक सकती है, दिल की धड़कन बिगड़ सकती है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. ऑक्सीजन की कमी से शरीर नीला पड़ने लगता है, जिसे सायनोसिस कहा जाता है. हाल के महीनों में लॉस एंजिल्स, मियामी, न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स में इसके कई मामले सामने आए हैं.
2025 में न्यूयॉर्क में एक तस्करी केस के दौरान पिंक कोकीन के साथ दर्जनों हथियार भी जब्त किए गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2020 से जुलाई 2024 के बीच इससे जुड़ी कई मौतें दर्ज की गईं. 2024 की शुरुआत से चार राज्यों में कम से कम 18 गंभीर मामले सामने आए, जिनमें कई लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. माना जाता है कि इस ड्रग की शुरुआत कोलंबिया से हुई थी.
वहां इसे क्लब ड्रग के रूप में पेश किया गया और गुलाबी रंग को पहचान बनाया गया. धीरे धीरे यह लैटिन अमेरिका से अमेरिका और यूरोप तक फैल गया. विशेषज्ञों का कहना है कि पिंक कोकीन अब एक ड्रग नहीं, बल्कि एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसका कोई तय इलाज या एंटीडोट मौजूद नहीं है. डॉक्टर केवल तब तक इलाज कर सकते हैं, जब तक नशा शरीर से बाहर न निकल जाए.