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जिनपिंग के Delete A प्लान से अमेरिका हैरान, टेंशन में दिग्गज टेक कंपनियां

USA China Relation: चीन सरकार ने अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनियों पर लगाम लगानी शुरू कर दी है. बीजिंग ने इसके लिए एक टॉप सीक्रेट दस्तावेज भी जारी किया है.

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जिनपिंग के  Delete A प्लान से अमेरिका हैरान,  टेंशन में दिग्गज टेक कंपनियां

USA China Relation: चीनी प्रशासन ने अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनियों पर लगाम लगानी शुरू कर दी है.  हालिया जारी आदेश में चीन में काम कर रही विदेशी कंपनियों को रिप्लेस करने की बात कही गई है इनका स्थान चीनी कंपनियां लेंगी. अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल की खबर के मुताबिक, जिनपिंग प्रशासन ने इसके लिए टॉप सीक्रेट दस्तावेज 79 भी जारी किया है जिसे देखने का अधिकार केवल प्रशासन के उच्च अधिकारियों को ही है. 

अमेरिकी अखबार के मुताबिक,  टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट 79 को चीन सरकार ने जारी किया है. दस्तावेज में बीजिंग में काम कर रही विदेशी कंपनियों को स्थानीय कंपनियों से रिप्लेस करने की बात कही गई है. दस्तावेज में अमेरिकी कंपनियां जिसमें सबसे ज्यादा निशाने पर हैं, अमेरिकी कंपनियों के लिए चीनी सरकार ने  Delete A शब्द का प्रयोग किया है. डिलीट ए का अर्थ है डिलीट अमेरिका. 

सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए लिया निर्णय 

दस्तावेज के तहत साल 2027 तक एनर्जी, वित्त और अन्य क्षेत्रों की राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों को अपने आईटी सिस्टम में विदेशी सॉफ्टवेयरों को बदलना होगा. चीन सरकार का यह कदम अमेरिका और दिग्गज टेक कंपनियों के लिए एक बड़ा झटता माना जा रहा है. चीन के तेज औद्योगिक और तकनीकी विकास में टेक कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है और उन्हें इसका फायदा भी मिला है.  लेकिन अब चीनी नेता इसे देश की दीर्घकालिक सुरक्षा चिंताओं और आत्मनिर्भरता के लिए इसे बदलना चाहते हैं. 

चीन में हो रहा नुकसान 

रिपोर्ट के अनुसार, चीन सरकार के निशाने पर सबसे पहले अमेरिका टेक जायंट्स हैं.  आईबीएम, डेल जैसी बड़ी हार्डवेययर निर्माता कंपनियां अपना मार्केट लगातार खोती जा रही हैं. इन कंपनियों को चीनी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. बीजिंग में काम कर रही इन कंपनियों के राजस्व में बीते कुछ सालों में बड़ी गिरावट आई है. माइक्रोसॉफ्ट और ऑरकेल जैसी कंपनियां भी इसी कड़ी में शामिल है जो चीन में लगातार नुकसान का सामना कर रही हैं. 

दुनिया का सिरमौर बनाएंगे जिनपिंग 

यह सारे प्रयास चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की चीन को दुनिया का सिरमौर बनाने की नीति का हिस्सा हैं. इस नीति के तहत चीन ने 2049 तक दुनिया की सबसे आधुनिक और बड़ी वैश्विक महाशक्ति बनने का लक्ष्य रखा है. इसके तहत चीन ने क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे- सेमीकंडक्टर, फाइटर जेट प्रोडक्शन, अनाज और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के प्रयास कर रहा है.  जिनपिंग का इस बात पर जोर अधिक है कि चीन को पश्चमी निर्भरता को खत्म कर घरेलू सप्लाई चेन पर फोकस कर सके.