नई दिल्ली: सूर्य की सतह पर हाल ही में एक बेहद बड़ा और सक्रिय सनस्पॉट दिखाई दिया है, जिसे वैज्ञानिकों ने रीजन 4366 नाम दिया है. यह सनस्पॉट बहुत कम समय में तेजी से फैल गया और अब यह इतना अस्थिर हो चुका है कि लगातार शक्तिशाली सौर ज्वालाएं छोड़ रहा है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह आकार में 1859 के ऐतिहासिक कैरींगटन इवेंट वाले सनस्पॉट के लगभग आधे तक पहुंच गया है, जिसने उस समय भारी तबाही मचाई थी.
पिछले 24 घंटों में ही इस सनस्पॉट से 20 से ज्यादा सौर ज्वालाएं निकली हैं. इनमें कई एम-क्लास और बेहद ताकतवर एक्स-क्लास ज्वालाएं शामिल हैं. एक्स-क्लास ज्वालाएं सबसे खतरनाक मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें ऊर्जा का स्तर बहुत अधिक होता है. हाल ही में निकली X8.1 श्रेणी की ज्वाला को पिछले दो सालों की सबसे बड़ी सौर घटना माना जा रहा है.
इस बड़े विस्फोट के साथ सूर्य से एक विशाल प्लाज्मा बादल भी निकला, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है. एक एजेंसी के अनुसार, यह बादल 5 फरवरी को धरती के पास से गुजर सकता है. पूरी टक्कर की संभावना कम है, लेकिन हल्का प्रभाव भी अंतरिक्ष मौसम को बिगाड़ सकता है.
अगर CME धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराता है, तो ध्रुवीय इलाकों के अलावा कम अक्षांशों पर भी नॉर्दर्न लाइट्स यानी ऑरोरा दिखाई दे सकते हैं. यह देखने में बेहद सुंदर होता है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं. रेडियो संचार में बाधा, GPS सिस्टम में गड़बड़ी, और सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है.
नासा के मुताबिक, सूर्य इस समय अपने सोलर मैक्सिमम चरण में है, जो हर 11 साल में आता है. 2024 से शुरू हुआ यह दौर 2026 तक सक्रिय रह सकता है. ऐसे में आने वाले समय में और भी तेज सौर गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं. वैज्ञानिक लगातार इस सनस्पॉट पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी बड़े खतरे से पहले चेतावनी दी जा सके.