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वैक्सीन से सिकुड़ रहे प्राइवेट पार्ट! झूठी अफवाह से बौखलाई भीड़ ने हेल्थ वर्कर्स को भी नहीं छोड़ा; अब तक 17 लोगों की मौत

कांगो में वैक्सीन को लेकर फैली झूठी अफवाह ने हिंसा भड़का दी. कई हेल्थ वर्कर्स को भीड़ ने मार डाला. चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

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Km Jaya

नई दिल्ली: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो के शोपो प्रांत में एक अफवाह फैली कि पुरुषों के जननांग सिकुड़ रहे हैं और गायब हो रहे हैं. इससे हिंसा की एक लहर भड़क उठी. जिसके चलते अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है. 

इस काल्पनिक बीमारी के डर से पागल हुई भीड़ ने उन स्वास्थ्य कर्मियों को भी नहीं बख्शा जो वहां रिसर्च कर रहे थे. स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि टीकों की वजह से उनके निजी अंग सिकुड़ जाएंगे.

कैसे फैली यह अफवाह?

हिंसा का यह सिलसिला पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुआ था. उस समय सोशल मीडिया अचानक ऐसे वीडियो और संदेशों से भर गया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि एक रहस्यमयी बीमारी पुरुषों को नपुंसक बना रही है. जब तक सरकार और स्वास्थ्य संगठन इस अफवाह पर काबू पाते, तब तक यह डर हिंसा का रूप ले चुका था. जांच के मुताबिक इस इन्फोडेमिक यानी गलत सूचनाओं ने कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से ठप कर दिया था.

कब हुई ये घटना?

इसी बीच 6 अक्टूबर को इसांगी इलाके के इलांबी गांव में एक घटना घटी. स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम वहां टीकाकरण से जुड़ी रिसर्च करने पहुंची थी. बाहर से आए लोगों को चमकीली जैकेट पहने और टैबलेट लिए देखकर, गांव के युवाओं ने मान लिया कि यही वे लोग हैं जो बीमारी फैला रहे हैं. 

भीड़ ने टीम पर हमला कर दिया. जीन-क्लाउड मबातु जो इस हमले से बाल-बाल बचे थे, उसने बताया कि उनकी टीम के दो डॉक्टरों प्लेसिड मबुंगी और जॉन तांगाकेया उसने भीड़ को समझाने की कोशिश की, लेकिन बेकाबू भीड़ ने उन्हें मौके पर ही मार डाला.

डॉ. तांगाकेया की विधवा ने क्या बताया?

डॉ. तांगाकेया की विधवा जस्टिन ने रोते हुए बताया कि उन्होंने उन्हें जिंदा जला दिया. इसके कुछ ही समय बाद पास के याफिरा गांव में भी दो और स्वास्थ्य कर्मियों मैथ्यू मोसिसि और केविन इलुंगा को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. 

अधिकारियों के मुताबिक जिस रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए ये स्वास्थ्य कर्मी इस इलाके में आए थे, उसका इस कथित बीमारी से कोई लेना-देना नहीं था.

किसने फैलाई अफवाह?

इस पूरी घटना की जड़ें सोशल मीडिया और स्थानीय धार्मिक संस्थाओं में बहुत गहराई तक जमी हुई पाई गईं. रिपोर्ट में बताया गया कि दर्जनों ऐसे वीडियो मिले, जिनमें कई पादरी इस अफवाह को और भड़काते हुए दिखाई दिए. 

क्या पादरी ने पहले भी ऐसा किया?

हैरानी की बात यह है कि इसी पादरी को पहले भी COVID-19 के इलाज के बारे में झूठे दावे करने के लिए सजा मिल चुकी थी. फिर भी उसका प्रभाव जरा भी कम नहीं हुआ है. 

ये वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महीनों तक घूमते रहे और लोगों को गुमराह करते रहे. हालांकि अब अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए, अफवाहें फैलाने के आरोप में लगभग एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया है और एक व्यक्ति को जेल भेज दिया है.