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20 साल तक यूरेनियम पर रोक चाहता है अमेरिका, ईरान 5 से ज्यादा के लिए तैयार नहीं! अब क्या होगा फाइनल फैसला

अमेरिका और ईरान के बीच यूरेनियम संवर्धन को लेकर बातचीत जारी है. हालांकि अभी तक कोई फाइनल फैसला सामने नहीं आया है. इस समझौते को फाइनल करवाने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थता कर रहा है.

X (@MojtabaKhamen)
Shanu Sharma

अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी बातचीत जारी है. रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच यूरेनियम को लेकर बात नहीं बन पा रही है. Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान से कम से कम 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने की मांग की है, जबकि ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. ईरान इस पर मात्र 5 साल की रोक मानने के लिए तैयार है. 

 Axios का कहना है कि अमेरिका ईरान से यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल की रोक के साथ-साथ कई अन्य पाबंदियां भी लगाने की मांग कर रहा है. जिसमें मौजूदा यूरेनियम भंडार को पूरी तरह से हटाने की बात कही गई है. लेकिन ईरान के प्रस्ताव काफी अलग है.

अमेरिका और ईरान की अलग मांगे

रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन पर  5 साल की रोक के साथ भंडार को खत्म करने के बजाय 'डाउन-ब्लेंडिंग' का सुझाव दिया है. जिसके कारण दोनों के बीच चल रही बातचीत काफी जटिल हो गई है. इसी बीच  राजनीतिक विश्लेषक इयान ब्रेमर ने मंगलवार को X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि दोनों देश यूरेनियम संवर्धन पर 12.5 साल की रोक लगाने के समझौते के काफी करीब पहुंच गए हैं. हालांकि इन दावों के साथ उन्होंने कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किए.

क्या इन तीनों देशों की मेहनत होगी सफल?

दोनों देशों के बीच चल रही इस संवेदनशील वार्ता में  पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका में नजर आ रहे हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों देशों के मतभेदों को दूर करने की कोशिश की जा रही है. वहीं तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि शुरुआती दौर में दोनों पक्ष अपनी मांगें अधिकतम स्तर पर रख रहे थे. लेकिन अब वे संघर्ष-विराम बनाए रखने और आम सहमति बनाने के लिए प्रतिबद्ध नजर आने लगे हैं.

मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलाती भी इस प्रक्रिया में सक्रिय हैं. ईरान और अमेरिका के बीच 15 दिनों के लिए युद्ध विराम का ऐलान किया गया है. यानी की 21 अप्रैल को यह समझौता खत्म हो जाएगा. उससे पहले दोनों देशों की बातचीत जारी है. अगर इस बीच दोनों देश समझौते के लिए तैयार नहीं होते हैं तो एक बार फिर से मिडिल ईस्ट में तनाव देखने को मिल सकता है. हालांकि यूरेनियम समझौते को फाइनल करना आसान नहीं है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो इसे मध्यस्थता कर रहे देशों की जीत मानी जाएगी.