'पहले सार्थक बातचीत, तभी आगे बढ़ेगी बात', ईरान से समझौते के मूड में नहीं अमेरिका! ट्रंप के बयान ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल किसी भी समझौते से इनकार कर दिया है. वहीं ईरान ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में संघर्ष और गहराने की आशंका बढ़ गई है.

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Shanu Sharma

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब रौद्र रूप लेता नजर आ रहा है. दोनों देश एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले करने से थोड़ा भी झिझकते नजर नहीं आ रहे हैं. एक ओर अमेरिका ईरान के अलग-अलग शहरों पर बम बरसा रहा है. वहीं दूसरी तरफ ईरान अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी युद्ध टलने की संभावना से इनकार दिया है. ट्रंप ने ईरान के साथ फिलहाल किसी भी समझौते को खारिज कर दिया है. उन्होंने व्हाइट हाउस में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के साथ बातचीत के दौरान नया दावा किया है.

ईरान के साथ बातचीत पर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने कहा कि तेहरान जब तक सार्थक बातचीत के लिए तैयार नहीं होता है, अमेरिका को उनके साथ बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान उनके साथ बातचीत करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अभी के हालात के मुताबिक अमेरिका बातचीत के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूं कि वे बहुत बेताबी से मिलना चाहते हैं, लेकिन हमारी उनसे मिलने में कोई दिलचस्पी नहीं है. राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि वे बर्बाद हो रहे हैं, इसी वजह से वे मिलना चाहते हैं. वहीं दूसरी ओर ईरान अपने कदम पीछे लेने के लिए तैयार नजर नहीं आ रहा है.


ईरानी नेताओं की सुप्रीम लीडर से बढ़ी बातचीत 

नेशनल इंडस्ट्री एंड माइनिंग डे समारोह में बोलते हुए, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अब हमारे प्रिय नेता के साथ बातचीत का दायरा बढ़ गया है और उनके बताए गए निर्देशों के मुताबिक हम काम कर रहे हैं. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हम मजबूती से आगे बढ़ते रहेंगे.

बता दें कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर बातचीत चल रही थी, तभी अचानक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो जहाजों पर हुए हमले ने इस युद्ध को बढ़ा दिया. एक ओर ईरान द्वारा लगातार होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर पकड़ बनाने की कोशिश की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर अमेरिका होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल नहीं होने देना चाह रहा था. जहाजों पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर जमकर बमबारी शुरू कर दी, वहीं ईरान भी आसपास के देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए.