रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़ा 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सामने है. अमेरिकी सीनेट इसे पिछले महीने 86 के मुकाबले 11 वोटों से मंजूरी दे चुकी है. अब सदन में इस पर चर्चा और मतदान होना बाकी है.
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले सदन के अवकाश पर जाने का कार्यक्रम है. ऐसे में बिल पर कार्रवाई के लिए सांसदों के पास सीमित समय बचा है. इसी बीच इसमें कई अहम संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं.
डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर के प्रस्तावित संशोधन में रूस के प्रमुख तेल व्यापारिक साझेदारों को कानून में स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की गई है. इसमें भारत और चीन के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य के नाम शामिल हैं.
प्रस्ताव के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति को इन देशों से होने वाले कारोबार पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. हालांकि, यह अभी केवल संशोधन प्रस्ताव है और इसे अंतिम कानून का हिस्सा बनने के लिए प्रतिनिधि सभा की मंजूरी जरूरी होगी.
अमेरिका इस कानून के जरिए रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उसके कथित शैडो फ्लीट पर शिकंजा कसना चाहता है. अमेरिका का आरोप है कि कुछ जहाज पश्चिमी प्रतिबंधों से बचते हुए रूस के तेल कारोबार को जारी रखने में मदद करते हैं. वाशिंगटन का तर्क है कि रूस के तेल निर्यात से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन में जारी युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराता है. इसी वजह से रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है.
वहीं, डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने बिल के सेक्शन 113 को पूरी तरह हटाने का संशोधन पेश किया है. यह प्रावधान राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक सेकेंडरी टैरिफ लगाने की शक्ति दे सकता है. मीक्स के प्रस्ताव को तीन अन्य सांसदों का भी समर्थन मिला है. मीक्स ने प्रतिबंधों में सीमित अवधि की छूट और यूक्रेन को रक्षा सामग्री खरीदने के लिए 15 अरब डॉलर का सीधा कर्ज देने से जुड़ा संशोधन भी पेश किया है.