नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. युद्धविराम की समयसीमा करीब आने के साथ ही पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के प्रयास बढ़ा दिए हैं. हालात इतने नाजुक हैं कि किसी भी छोटी चूक से बड़ा टकराव हो सकता है. दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है. ऐसे समय में पाकिस्तान की मध्यस्थता को अहम माना जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने पिछले 24 घंटों में अमेरिका और ईरान से संपर्क बढ़ाया है. इस्लामाबाद में 22 अप्रैल को संभावित वार्ता कराने की कोशिश की जा रही है. इससे पहले की बातचीत सफल नहीं हो सकी थी. पाकिस्तानी नेतृत्व अब दोनों पक्षों को एक बार फिर आमने-सामने लाने की कोशिश में जुटा है.
अमेरिकी प्रशासन ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान को सख्त संदेश दिया है. व्हाइट हाउस की पोस्ट में साफ संकेत दिया गया कि अब समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. इसमें यह भी कहा गया कि अमेरिका अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा. यह बयान एक तरह से चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.
ईरान ने भी अमेरिकी रुख का जवाब देते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी है. उसने स्पष्ट किया है कि दबाव में वह पीछे नहीं हटेगा. क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी समय स्थिति बिगड़ सकती है.
संभावित वार्ता को देखते हुए पाकिस्तान ने राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी है. रेड जोन और आसपास के इलाकों में सख्त निगरानी रखी जा रही है. कई सड़कों को बंद कर दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है. यह कदम संभावित बातचीत को सुरक्षित माहौल देने के लिए उठाए गए हैं.
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या दोनों देश बातचीत के लिए तैयार होते हैं या नहीं. अगर वार्ता सफल नहीं होती, तो तनाव और बढ़ सकता है. ऐसे में वैश्विक स्तर पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. फिलहाल सभी की नजर 22 अप्रैल पर टिकी है.