'अमेरिकी राष्ट्रपति एक्शन लेने वाले व्यक्ति हैं...', तनाव के बीच फारसी भाषा में आया मैसेज; मिडिल ईस्ट में जंग की आहट!
ईरान में लोगों के मोबाइल पर रहस्यमय संदेश पहुंचने के बीच अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने सीमित सैन्य हमले पर विचार की बात कही है, जबकि जिनेवा में वार्ता प्रस्तावित है और ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है.
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है. सोमवार को ईरान में हजारों लोगों के फोन पर फारसी भाषा में एक संदेश आया, जिसमें लिखा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति एक्शन लेने वाले व्यक्ति हैं, इंतजार कीजिए. इस घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर सख्त बयान दिए हैं और मध्य पूर्व में सैन्य तैनाती बढ़ाई है. जिनेवा में दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता भी प्रस्तावित है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह संदेश एक अज्ञात नंबर से भेजा गया. संदेश ऐसे समय आया है, जब ट्रंप प्रशासन तेहरान पर दबाव बढ़ा रहा है. क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत और विमान तैनात किए गए हैं. इससे संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं तेज हो गई हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप का सख्त रुख
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान पर सीमित सैन्य हमले पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के पास समझौते के लिए अधिकतम 15 दिन हैं. जिनेवा में गुरुवार को वार्ता प्रस्तावित है. दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कूटनीतिक समाधान की अच्छी संभावना है, लेकिन देश सैन्य दबाव में नहीं झुकेगा.
परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नागरिक उपयोग के लिए है. पश्चिमी देश इसे परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कदम मानते हैं. वाशिंगटन चाहता है कि बातचीत में ईरान की मिसाइल परियोजना और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों को समर्थन का मुद्दा भी शामिल हो.
सड़कों पर विरोध की लहर
इसी बीच ईरान में छात्रों ने नए सत्र की शुरुआत के साथ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं. सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में तेहरान के एक विश्वविद्यालय में छात्रों को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अपनाए गए राष्ट्रीय ध्वज को जलाते देखा गया. प्रदर्शनकारियों ने इस्लामी गणराज्य के खिलाफ नारे लगाए. जनवरी में चरम पर पहुंचे प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने हिंसक तरीके से दबाया था.
मौतों के आंकड़े और वैश्विक चिंता
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की संस्था एचआरएएनए ने सात हजार से अधिक मौतों का दावा किया है, जिनमें अधिकांश प्रदर्शनकारी बताए गए हैं. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, तीन हजार से अधिक लोगों की जान गई, जिनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. बढ़ते तनाव के बीच भारत समेत स्वीडन, सर्बिया, पोलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है.
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