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एक साल के अंदर दूसरी बार भारत दौरे पर आएंगे राष्ट्रपति पुतिन, ब्रिक्स समिट होंगे शामिल

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साल के अंदर दूसरी बार भारत दौरे पर आने वाले हैं. इस बात की जानकारी रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दी है.

ANI
Shanu Sharma

भारत की राजधानी नई दिल्ली में इस साल सितंबर महीने में  ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होने वाला है. जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल होंगे. इस बात की जानकारी देते हुए राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुतिन शिखर सम्मेलन में निश्चित रूप से शामिल होंगे.

राष्ट्रपति पुतिन भारत में दूसरी बार एक साल से भी कम समय के अंदर आएंगे. इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और भी ज्यादा मजबूत होगी. इससे पहले पुतिन आखिरी बार दिसंबर 2025 में दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आए थे. उस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में विस्तृत चर्चा की थी.

दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर होगी बातचीत

भारत-रूस के बीच 'रणनीतिक साझेदारी घोषणा' की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर हुई थी. इस ऐतिहासिक घोषणा पर वर्ष 2000 में पुतिन की पहली भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे. दोनों देशों के बीच सुरक्षा, ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग पिछले कई दशकों से निरंतर बढ़ता जा रहा है.

नई दिल्ली सितंबर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 18वें  ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. यह सम्मेलन भारत की  ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान आयोजित होगा. इस बार का शिखर सम्मेलन वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और चुनौतियों के बीच हो रहा है, जब उभरती अर्थव्यवस्थाएं एक मजबूत आवाज बनने की कोशिश कर रही हैं.

क्या है ब्रिक्स समूह?

ब्रिक्स समूह अब काफी विस्तारित हो चुका है. वर्तमान में इसमें 11 सदस्य देश शामिल हैं. जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल है. इसके अलावा बेलारूस, नाइजीरिया, मलेशिया और वियतनाम जैसे देश सहयोगी सदस्य के रूप में जुड़ रहे हैं. यह मंच वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समन्वय का प्रमुख केंद्र बन चुका है. इसमें वैश्विक शासन सुधार, ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषय शामिल हैं. हाल के वर्षों में समूह ने विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब विश्व कई चुनौतियों- भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन से जूझ रहा है.