नई दिल्ली: अमेरिका में राष्ट्रपति और न्यायपालिका के बीच एक बड़ी संवैधानिक रस्साकशी शुरू हो गई है. वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाले अपने 'टैरिफ प्लान' पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के कुछ ही दिनों बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला 'यू-टर्न' लिया है. ट्रंप ने दावा किया है कि अदालत के इस हास्यास्पद फैसले ने वास्तव में उन्हें अन्य कानूनों के तहत आयात शुल्क लगाने की और भी अधिक और भयानक शक्तियां प्रदान कर दी हैं.
बीते 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि ट्रंप ने 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत व्यापक टैरिफ लगाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है. अदालत का तर्क था कि यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा आपात स्थितियों के लिए है, न कि सामान्य व्यापार नीति के लिए.
US President Donald Trump posts - "Any Country that wants to “play games” with the ridiculous Supreme Court decision, especially those that have “Ripped Off” the U.S.A. for years, and even decades, will be met with a much higher Tariff, and worse, than that which they just… pic.twitter.com/Miol56TRLJ
— ANI (@ANI) February 23, 2026
इस फैसले से बिफरे ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जजों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने न्यायाधीशों को देशद्रोही और संविधान के प्रति निष्ठाहीन तक कह डाला. उन्होंने लिखा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अनजाने में मुझे पहले से कहीं अधिक ताकत और मजबूती दे दी है.
अदालती झटके के बावजूद ट्रंप पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. व्हाइट हाउस ने फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर 'व्यापार अधिनियम 1974' की धारा 122 (Section 122) के तहत एक संशोधित योजना पेश कर दी. ट्रंप ने मंगलवार सुबह से प्रभावी होने वाले 15 प्रतिशत विश्वव्यापी टैरिफ दर पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. यह कानून प्रशासन को कांग्रेस की मंजूरी के बिना लगभग पांच महीनों तक अस्थायी आयात कर लगाने की अनुमति देता है. ट्रंप का तर्क है कि अब वे कानूनी निश्चितता के साथ लाइसेंसिंग और अन्य टैरिफ उपकरणों का उपयोग "बहुत अधिक शक्तिशाली और आक्रामक तरीके से" कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में, अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) ने एक बयान जारी कर कहा है कि 1977 के IEEPA कानून के तहत टैरिफ की वसूली मंगलवार स्थानीय समयानुसार रात 12:01 बजे से बंद कर दी जाएगी. हालांकि, ट्रंप द्वारा नए कानून के तहत लगाए गए 15% टैरिफ ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों और व्यापारिक सहयोगियों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है. फिलहाल राष्ट्रपति और न्यायपालिका के बीच यह टकराव अमेरिकी लोकतंत्र के लिए एक नया मोड़ साबित हो रहा है.