नई दिल्ली: 27 फरवरी 2019 की वह सुबह भारतीय वायुसेना के शौर्य और पाकिस्तान के शर्मनाक झूठ के गवाह के रूप में इतिहास में दर्ज है. पुलवामा हमले के जवाब में भारत द्वारा की गई बालाकोट एयर स्ट्राइक के ठीक 24 घंटे बाद, नियंत्रण रेखा (LoC) पर बारूद की गंध और तनाव चरम पर था. उस दिन क्या हुआ था, इसकी एक ऐसी गवाही सामने आई है जिसने पाकिस्तान के वर्षों पुराने सफेद झूठ की धज्जियां उड़ा दी हैं. यह गवाही किसी और ने नहीं, बल्कि उस वक्त सीमा पर तैनात पाकिस्तान आर्मी की 'अल शमशाम बटालियन' के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) उमैर बंगश ने दी है.
जूलियन डोरी को दिए एक इंटरव्यू में कर्नल बंगश ने उस मंजर को याद करते हुए बताया कि वे अपने साथी मेजर मोइज अब्बाद शाह के साथ बैरक के बाहर खड़े थे. अचानक आसमान एक भीषण गूंज से थर्रा उठा. कुछ ही देर में जलता हुआ मलबा जमीन की ओर गिरता दिखा. बंगश के शब्दों में- 'वह मिग-21 बाइसन का टुकड़ा था.' लेकिन असली कहानी मलबे के साथ खुले पैराशूटों में छिपी थी. कर्नल ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने आसमान में तीन पैराशूट देखे, एक काफी आगे निकल गया था और दो पैराशूट पीछे की ओर थे.
यही वह बिंदु है जहां पाकिस्तान का 'नो F-16 लॉस' का दावा पूरी तरह धराशायी हो जाता है. भारत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान एक सिंगल सीटर मिग-21 उड़ा रहे थे. अगर अभिनंदन अकेले थे, तो बाकी दो पैराशूट किसके थे? कर्नल बंगश का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि अभिनंदन ने पकड़े जाने से पहले पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया था और वे दो पैराशूट उसी विमान के पायलटों के थे जिन्हें इमरजेंसी इजेक्ट करना पड़ा था.
A #PakistanArmy SSG battalion commander, posted along the Line of Control on 27 Feb 2019, recently stated in a podcast that he saw three parachutes in #Pakistan-occupied Jammu and Kashmir. This account aligns and confirms reports that a Pakistani #F16 was shot down by an Indian… pic.twitter.com/C99HGRuYhC
— IDU (@defencealerts) February 22, 2026
कर्नल बंगश ने इंटरव्यू में उस वक्त की अपनी मानसिक स्थिति को बयां करते हुए कहा- 'मैंने सोचा कि ये इन्होंने क्या सिलसिला शुरू किया है. परसों रात बालाकोट में दरख्त और कौवे मार दिए, और अब ये हमारा जहाज गिराया, क्या हो गया है?' यह स्वीकारोक्ति दर्शाती है कि पाक सेना के भीतर उस समय भारी खलबली थी. अभिनंदन को पकड़ लिया गया और भारत के कड़े रुख के बाद 1 मार्च को उन्हें रिहा करना पड़ा, लेकिन कर्नल बंगश के इस कबूलनामे ने पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा की पूरी रणनीति को बेनकाब कर दिया है.