स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता, लेबनान-होर्मुज और परमाणु समझौते पर हुई अहम चर्चा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा चिंताओं के बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई नई वार्ता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

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Meenu Singh

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा चिंताओं के बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई नई वार्ता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की, जिनमें लेबनान में युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना और संभावित परमाणु समझौते की दिशा में आगे बढ़ना शामिल रहा. शुरुआती दौर की बातचीत को दोनों पक्षों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

रिपोर्टों के मुताबिक, ये बातचीत हाल ही में हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) के तहत आयोजित की गई. रविवार को शुरू हुई बैठकों में राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर कई मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. वार्ताकारों ने क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य के सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की.

लेबनान में युद्धविराम बनाए रखने पर जोर

बातचीत का एक प्रमुख विषय लेबनान की स्थिति रहा. दोनों पक्षों ने दक्षिणी लेबनान में जारी तनाव और संघर्ष को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा की. वार्ता का उद्देश्य मौजूदा युद्धविराम को प्रभावी बनाए रखना और किसी भी संभावित सैन्य टकराव को रोकने के लिए बेहतर तंत्र विकसित करना था. इसे क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.


होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनी सहमति

चर्चाओं में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य पर भी प्रमुखता से विचार किया गया. यह रणनीतिक जलमार्ग, जिससे वैश्विक तेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है, हाल ही में ईरान द्वारा इसे बंद करने की आशंका जताए जाने के बाद से चिंता का विषय बना हुआ है.

अमेरिकी राजनयिक ने बताया कि, 'हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यह पूरी तरह से खुला रहे. हमने इस दिशा में अच्छी प्रगति की है.'

परमाणु समझौते को लेकर आगे बढ़ी बातचीत

बैठक में संभावित परमाणु समझौते के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई. अधिकारियों ने भविष्य में राजनीतिक नेतृत्व और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच वार्ता जारी रखने की रूपरेखा तैयार करने पर काम किया. इसका उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना और विश्वास बहाली की दिशा में आगे बढ़ना है.

अस्थायी विराम, लेकिन संपर्क जारी

हालांकि कुछ रिपोर्टों में बातचीत में अस्थायी विराम  की बात सामने आई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच संवाद पूरी तरह रुका नहीं है. मध्यस्थ देशों की भूमिका अभी भी सक्रिय बनी हुई है और पर्दे के पीछे संपर्क जारी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुरुआती दौर भविष्य में किसी व्यापक समझौते की नींव तैयार कर सकता है.