भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि पानी उनके देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है और यदि जल आपूर्ति पर गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ तो पाकिस्तान युद्ध का रास्ता भी अपना सकता है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच जल संसाधनों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उनकी सरकार भारत से जुड़े जल मामलों पर लगातार नजर रख रही है. उनके अनुसार यदि पाकिस्तान को यह महसूस हुआ कि भारत तेजी से ऐसे कदम उठा रहा है जिनसे पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, तो इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा माना जाएगा. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पानी केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
We will go to war with India 🇮🇳 if they do not change their behavior regarding water.
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) June 20, 2026
Because water is life, and they are taking it away from us.
• Pak Defence Minister: Khawaja Asif pic.twitter.com/GAuwUqtdVO
हाल के दिनों में सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद और गहरे हुए हैं. पाकिस्तान का आरोप है कि भारत नदी जल प्रवाह से जुड़े मामलों में ऐसे कदम उठा रहा है जो संधि की भावना के अनुरूप नहीं हैं. ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि पाकिस्तान वर्षों से संधि के तहत भारतीय परियोजनाओं की निगरानी करता रहा है और अनेक निरीक्षण भी किए गए हैं. दूसरी ओर भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उसने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था. भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद बंद होने तक यह रुख जारी रहेगा.
पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. देश के कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में पानी की कमी का असर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है. सिंध और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में जल उपलब्धता घटने से किसानों की परेशानियां बढ़ी हैं. स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है. कई प्रमुख नहरों और सिंचाई प्रणालियों में पानी की कमी दर्ज की गई है, जिससे प्रांतीय स्तर पर जल बंटवारे को लेकर विवाद भी तेज हो रहे हैं. यही वजह है कि जल संसाधनों का मुद्दा पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में भी महत्वपूर्ण बन गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बढ़ती बयानबाजी दोनों देशों के संबंधों को और जटिल बना सकती है. सिंधु जल संधि को लंबे समय तक भारत और पाकिस्तान के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता रहा है. हालांकि हाल की घटनाओं और आरोपों ने इस व्यवस्था को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है. पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहा है, जबकि भारत अपने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रमुखता दे रहा है. ऐसे माहौल में कूटनीतिक संवाद और पारदर्शिता को बढ़ावा देना दोनों देशों के लिए आवश्यक माना जा रहा है, ताकि जल संसाधनों को लेकर पैदा हुए तनाव को और अधिक गंभीर होने से रोका जा सके.