न्यूयॉर्क में हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का संबोधन गहरी चेतावनी और उम्मीद का संदेश लेकर आया. गुटेरेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र केवल एक मीटिंग हॉल नहीं, बल्कि मानवता के लिए नैतिक दिशा, अंतरराष्ट्रीय कानून का संरक्षक और संकटग्रस्त लोगों के लिए जीवनरेखा है. उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि संस्थान का जन्म परिपूर्ण सपनों से नहीं, बल्कि अस्तित्व की हकीकत से हुआ था.
गुटेरेस ने अपने संबोधन में कहा कि आठ दशक पहले दुनिया युद्ध की विभीषिका से जूझ रही थी. उसी समय नेताओं ने अराजकता के बजाय सहयोग और युद्ध के बजाय शांति को चुना. यह निर्णय केवल राजनीतिक नहीं बल्कि मानवता की रक्षा की व्यावहारिक रणनीति थी. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को भी उसी भावना की आवश्यकता है, जहां राष्ट्र मिलकर वैश्विक चुनौतियों से जूझें.
महासचिव ने कहा कि वर्तमान समय में मानवता 'reckless disruption' और 'relentless human suffering' के दौर में है. युद्ध, जलवायु संकट, असमानता और तकनीकी दुरुपयोग जैसे खतरे दुनिया को अस्थिर कर रहे हैं. गुटेरेस ने चेतावनी दी कि यदि देशों ने साझा कदम नहीं उठाए, तो यह युग और अधिक पीड़ा और अस्थिरता लेकर आएगा.
UN chief warns world leaders that humanity has entered 'an age of reckless disruption and relentless human suffering,' reports AP. pic.twitter.com/tp3MB7Z7qy
— Press Trust of India (@PTI_News) September 23, 2025
गुटेरेस ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र केवल बातचीत का मंच नहीं, बल्कि शांति स्थापना का साधन, टिकाऊ विकास का उत्प्रेरक और मानवाधिकारों का प्रहरी है. उन्होंने कहा कि यह संस्था दुनिया को नैतिक दिशा देने वाला 'moral compass' है. यहां लिए गए निर्णय केवल कागज पर नहीं रहते, बल्कि इन्हें कार्रवाई में बदला जाता है.
VIDEO | New York, USA: UN secretary-general Antonio Guterres (@antonioguterres) says, "Eight years ago, in a world scorched by war, leaders made a choice. Cooperation over chaos. Law over lawlessness. Peace over conflict. And that choice gave birth to the United Nations, not as a… pic.twitter.com/y6G5kMD6dK
— Press Trust of India (@PTI_News) September 23, 2025
अपने संबोधन के अंत में गुटेरेस ने सदस्य देशों से अपील की कि वे संकीर्ण राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर शांति, विकास और मानवता के अस्तित्व के लिए काम करें. उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियां किसी एक देश के बस की नहीं हैं, बल्कि इन्हें हल करने के लिए सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है.