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India Daily

अमेरिका ने क्यों बम से उड़ाए अपने ही फाइटर जेट? एक पायलट को बचाने के लिए फूंके इतने अरब रुपये

ईरान में मार गिराए गए F-15E जेट के पायलट और एयरमैन को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 46 अरब रुपए खर्च किए. बचाव अभियान में कई आधुनिक विमान और हेलीकॉप्टर नष्ट हो गए. ट्रंप ने इस ऑपरेशन को ऐतिहासिक बताया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
अमेरिका ने क्यों बम से उड़ाए अपने ही फाइटर जेट? एक पायलट को बचाने के लिए फूंके इतने अरब रुपये
Courtesy: grok

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक बड़ा बचाव अभियान सफल रहा है. ईरान की सेना ने अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल जेट को मार गिराया था, जिसमें दो क्रू सदस्य सवार थे. अमेरिकी सेना ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. इस चुनौतीपूर्ण मिशन पर भारी खर्च हुआ है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अपनी सेना की बहादुरी का उदाहरण बताया. ऑपरेशन में कई महंगे हथियार इस्तेमाल हुए और कुछ को खुद अमेरिका ने नष्ट कर दिया ताकि वे दुश्मन के हाथ न लगें. यह घटना युद्ध के दौरान सुरक्षा बलों की तैयारियों को भी दिखाती है.

बचाव अभियान की भारी लागत

अमेरिकी सेना ने इस बचाव मिशन पर करीब 500 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में 46 अरब रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए. अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान काफी जोखिम भरा था. इसमें A-10 थंडरबोल्ट II जेट, MC-130J कमांडो II विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और MQ-9 रीपर ड्रोन जैसी आधुनिक मशीनरी शामिल थी.

F-15E जेट की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर है, जिसे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इस्फहान प्रांत के दक्षिण में मार गिराया. बचाव दल ने अंधेरे का फायदा उठाकर विशेष टीम उतारी और कवर फायर के जरिए ईरानी सैनिकों को दूर रखा. एक एयरमैन को पहाड़ी इलाके में 24 घंटे से ज्यादा छिपे रहना पड़ा. ट्रंप ने उसे सम्मानित कर्नल बताया और कहा कि वह अब सुरक्षित है.

अपने ही विमानों को उड़ाने का फैसला

बचाव अभियान के दौरान कई विमान तकनीकी खराबी या युद्ध स्थितियों के कारण बेकार हो गए. अमेरिकी सेना ने खुद दो लॉकहीड मार्टिन C-130 विमानों को बम से उड़ा दिया. इनकी कीमत हर एक 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा थी. इसका मकसद था कि ईरानी सेना इनकी तकनीक हासिल न कर सके.

साथ ही दो MH-6 लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर भी नष्ट कर दिए गए, जिनकी कीमत हर एक करीब 7.5 मिलियन डॉलर थी. ईरान ने दावा किया कि उसने कुछ MQ-9 रीपर ड्रोन भी मार गिराए, हालांकि अमेरिका ने इसकी पुष्टि नहीं की. बचाव दल ने बमों और ड्रोनों की मदद से एयरमैन की सुरक्षा सुनिश्चित की. यह फैसला दिखाता है कि अमेरिका अपनी तकनीक बचाने के लिए कितना बड़ा जोखिम उठा रहा है.

ईरान में F-15E जेट गिराए जाने की घटना

शुक्रवार 3 अप्रैल को ईरान ने F-15E स्ट्राइक ईगल जेट को मार गिराने का दावा किया. यह जेट हर मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है और हवा से जमीन तथा हवा से हवा में हमले के लिए जाना जाता है. जेट में पायलट और वेपन-सिस्टम ऑफिसर सवार थे. पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन दूसरे एयरमैन को पहाड़ी इलाके में ढूंढने में समय लगा. ईरान ने पायलट को पकड़ने वाले को इनाम देने की घोषणा भी की थी. अमेरिकी सेना ने विशेष टीम भेजकर दोनों को निकाला. ट्रंप ने इस सफलता पर खुशी जताई और कहा कि यह अमेरिकी सेना की सबसे साहसिक कार्रवाइयों में से एक है. घटना ईरान के दक्षिणी इलाके में हुई, जहां जंगली और पहाड़ी इलाका है.

युद्ध के दौरान बढ़ती चुनौतियां

यह बचाव अभियान अमेरिका-ईरान युद्ध में एक नया मोड़ लाया है. ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है और कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया तो और हमले होंगे. ऑपरेशन में शामिल हथियारों की कीमत और नुकसान से साफ है कि ऐसे मिशन कितने महंगे पड़ रहे हैं. अमेरिका ने अपने सैनिकों की जान बचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए और बेहतर रणनीति की जरूरत है. फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव जारी है. अमेरिकी सेना ने दिखाया कि अपने जवानों को बचाने के लिए वह कितना कुछ कर सकती है, भले ही खर्च कितना भी हो.