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अमेरिका ने ICC के जज और अधिकारियों पर लगाए कड़े प्रतिबंध, नेतन्याहू के खिलाफ वारंट पर किया पलटवार!

अमेरिका ने ICC के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और विदेश सचिव मार्को रूबियो ने फ्रांस के जज निकोलस गुइल्लू, कनाडा की जज किम्बर्ली प्रोस्ट सहित कई ICC अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. ये अधिकारी नेतन्याहू और अन्य मामलों की जांच से जुड़े हैं.

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Edited By: Princy Sharma
अमेरिका ने ICC के जज और अधिकारियों पर लगाए कड़े प्रतिबंध, नेतन्याहू के खिलाफ वारंट पर किया पलटवार!
Courtesy: Pinterest

Donald Trump VS ICC: अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के खिलाफ अपनी टकराव की रणनीति और तेज कर दी है. अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने फ्रांस के जज निकोलस गुइल्लू समेत कई ICC अधिकारियों पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं. ये जज नेतन्याहू के खिलाफ जारी वारंट से जुड़े केस की सुनवाई कर रहे हैं. इसके साथ ही कनाडा की जज किम्बर्ली प्रोस्ट और दो अन्य ICC के वरिष्ठ अधिकारी भी इस सूची में शामिल किए गए हैं.

फ्रांस ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और कहा है कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता के सिद्धांत के खिलाफ है. ICC ने भी इस कदम को न्यायालय की निष्पक्षता पर हमला बताया है. वहीं, इस कार्रवाई की अमेरिका में खूब सराहना हुई है, खासकर नेतन्याहू ने रूबियो की तारीफ करते हुए इसे इजराइल के खिलाफ झूठे आरोपों के खिलाफ एक साहसिक कदम बताया.

ICC ने लगाए आरोप

ICC ने नेतन्याहू पर गाजा में सैन्य ऑपरेशन के दौरान युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया है. कोर्ट ने पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलंट और हमास कमांडर मोहम्मद देइफ के खिलाफ भी वारंट जारी किए हैं. जज गुइल्लू को अमेरिका में यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज का सामना करना पड़ रहा है.

ICC जजों पर लगाए प्रतिबंध

इससे पहले जून में भी चार अन्य ICC जजों पर प्रतिबंध लगाए गए थे. अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि ये प्रतिबंध ICC के इजराइल विरोधी कदमों के खिलाफ हैं. खास बात यह है कि किम्बर्ली प्रोस्ट अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अत्याचारों की जांच में भी शामिल रही हैं.

यह अमेरिकी कदम ट्रंप प्रशासन के समय शुरू हुई नीति का हिस्सा है, जब ICC को अस्वीकार कर इसके अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे. हालांकि, बाइडेन प्रशासन ने कुछ प्रतिबंध हटाकर कोर्ट के साथ सीमित सहयोग की अनुमति दी थी, खासकर यूक्रेन से जुड़े मामलों में.

यह कदम तब आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में अलास्का में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की, जबकि ICC ने यूक्रेन पर आक्रमण के लिए पुतिन के खिलाफ भी वारंट जारी किया है.