Obama Arrest Video: अमेरिका की राजनीति एक बार फिर विवादों के भंवर में फंस गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक एआई-जनरेटेड यानी डीपफेक वीडियो शेयर किया, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को एफबीआई एजेंटों द्वारा ओवल ऑफिस में गिरफ्तार करते हुए दिखाया गया है. ट्रंप ने यह वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "ट्रुथ सोशल" पर बिना कोई टिप्पणी किए साझा किया, जिसके बाद यह क्लिप वायरल हो गई.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वीडियो की शुरुआत में राष्ट्रपति जो बाइडेन और अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं को यह कहते हुए दिखाया गया है, "कोई भी कानून से ऊपर नहीं है." इसके तुरंत बाद स्क्रीन पर जोकर की शक्ल वाला "पेपे द फ्रॉग" मीम आता है, जो उनके बयानों का मजाक उड़ाता प्रतीत होता है. इसके बाद बराक ओबामा को हथकड़ियों में, और फिर जेल के नारंगी कपड़ों में सलाखों के पीछे दिखाया गया है. वीडियो का कैप्शन भी यही था, "कोई भी कानून से ऊपर नहीं है."
Donald J. Trump Truth Social 07.20.25 06:47 PM EST pic.twitter.com/Xf5LYzkZiI
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यह डीपफेक वीडियो असली लगने के कारण सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं ला रहा है. ट्रंप समर्थकों ने इसे एक "सत्य की झलक" बताया, वहीं आलोचकों ने इसे बेहद भ्रामक और लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार दिया. रिपब्लिकन्स अगेंस्ट ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि यह "एपस्टीन फाइलों से ध्यान भटकाने की कोशिश" है. एक अन्य टिप्पणी में पूछा गया, "क्या ओबामा गिरफ्तार होंगे?" वहीं एक यूजर ने कहा, "इसे हकीकत बनाओ."
वीडियो ऐसे समय पर सामने आया है जब राष्ट्रीय खुफिया निदेशक रह चुकी तुलसी गबार्ड ने भी ओबामा प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने शुक्रवार को दावा किया कि उनके पास ऐसे 100 से अधिक दस्तावेज हैं, जो यह दिखाते हैं कि 2016 के चुनाव के बाद ट्रंप और रूस की मिलीभगत की कहानी ओबामा प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने गढ़ी थी, ताकि ट्रंप को राष्ट्रपति बनने से रोका जा सके.
गबार्ड ने कहा कि वह ये दस्तावेज एफबीआई और न्याय विभाग को सौंपने की योजना बना रही हैं, ताकि ओबामा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके. हालांकि, अब तक ओबामा या उनके पूर्व प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
इस घटना ने अमेरिकी राजनीति में एआई और डीपफेक की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है. इससे न केवल चुनावी विमर्श पर असर पड़ सकता है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं.