Syria Violence: सीरिया के दक्षिणी शहर स्वैदा में द्रूज समुदाय पर हुए भीषण अत्याचार ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है. सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल शरा की सेना ने एक सप्ताह में 194 द्रूजों को मौत की सजा दी है. स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, कई लोगों को सिर पर सटाकर गोली मारी गई. बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने सीधे गोली मारकर इनकी हत्या की.
बीबीसी ने सीरिया में काम करने वाली मानवाधिकार संगठन सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्युमन राइट्स यानी SOHR के हवाले से अपनी रिपोर्ट्स में बताया कि पिछले सप्ताह में कुल 1120 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें 427 द्रूज लड़ाके और 298 नागरिक शामिल हैं. साथ ही 354 सरकारी सैनिक और 21 सुन्नी बेदौइन लड़ाके भी मारे गए. इजरायल के हवाई हमले में सीरिया के 15 सैनिक मारे गए हैं.
गृह युद्ध की शुरुआत 13 जुलाई को हुई, जब एक द्रूज व्यापारी के अपहरण के बाद हिंसा भड़क उठी. यह घटना जल्द ही सांप्रदायिक संघर्ष में बदल गई. द्रूज और सुन्नी बेदौइन लड़ाकों के बीच भारी झड़पें हुईं, जिसमें द्रूज मिलिशिया ने भी जवाबी हमला किया. सरकारी सेना के हस्तक्षेप के बावजूद, उन पर द्रूज समुदाय को निशाना बनाने के आरोप लगे.
स्वैदा के अस्पतालों में हालत भयावह है. एक डॉक्टर के अनुसार, कम से कम 200 शव अस्पताल में पड़े हैं और कई शवों को मुर्दाघर के बाहर रखना पड़ा है. चिकित्सा सामग्री की भारी कमी है.
संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी के अनुसार, हिंसा के कारण कम से कम 1.28 लाख लोग विस्थापित हुए हैं. चार दिन की भीषण लड़ाई के बाद युद्धविराम घोषित किया गया, लेकिन रुक-रुक कर हिंसा जारी है. अब द्रूजों द्वारा छोटे बेदौइन ठिकानों पर हमले की खबरें भी आ रही हैं.
द्रूज समुदाय एक धार्मिक अल्पसंख्यक है, जो सीरिया, लेबनान और इजरायल में रहता है. इस्लाम की शिया शाखा से निकले इस समुदाय की मान्यताएं अलग हैं और ये पुनर्जन्म में विश्वास रखते हैं. इजरायल से इनके संबंध अच्छे हैं और वह इनकी सुरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाता है.
स्वैदा की हिंसा सीरिया की नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, जिसने राष्ट्र की एकता कायम रखने की कोशिश की थी लेकिन द्रूजों के साथ विश्वास की कमी इस एकता को खतरे में डाल रही है.