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India Daily

Elon Musk की SpaceX ने लॉन्च किया दुनिया का सबसे पावरफुल Starship V3 रॉकेट, हिंद महासागर में हुआ स्प्लैशडाउन

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने Starship V3 रॉकेट का सफल परीक्षण किया. दुनिया के सबसे ताकतवर और रीयूजेबल रॉकेट ने हिंद महासागर में स्प्लैशडाउन किया. यह मिशन मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

Dhiraj Kumar Dhillon
Elon Musk की SpaceX ने लॉन्च किया दुनिया का सबसे पावरफुल Starship V3 रॉकेट, हिंद महासागर में हुआ स्प्लैशडाउन
Courtesy: Starlink

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. स्पेसएक्स ने रॉकेट के इतिहास का सबसे विशालकाय और पावरफुल रॉकेट लॉंच किया है. स्टारशिप V3 के सफलतापूर्वक परीक्षण उड़ान में रॉकेट ने तय कार्यक्रम के मुताबिक करीब एक घंटे की देरी से उड़ान भरी, लेकिन अच्छी बात यह रही कि उड़ान तय कार्यक्रम के मुताबिक हिंद महासागर में स्प्लैशडाउन के हिंद महासागर में संपन्न हुई, जहां रॉकेट फट गया. स्पेसएक्स ने ऐसा ही प्लान किया था. प्लान के मुताबिक रॉकेट के कचरे को हिंद महासागर में ही गिराकर नष्ट करना था. ठीक वही हुआ.

इसलिए एक दिन की हुई देरी

स्पेसएक्स ने इस उड़ान की तैयार एक दिन पहले गुरुवार के ल‌िए की थी, लेकिन लॉन्च टावर में कुछ तकनीकी कमी आने कारण का कारण लॉ‌न्चिंग एक दिन आगे बढ़ा दी गई थी. आखिरकार शुक्रवार को सफलतापूर्वक लॉन्चिंग हो गई. स्पेसएक्स ने कहा है कि कंपनी अपने मकसद में कामयाब रही है. लॉन्चिंग के दौरान रॉकेट ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रॉकेट लॉन्चिंग के दोनों चरणों में इंजन फेल होने की समस्या आई लेकिन कंपनी के मुताबिक इसके बावजूद अधिकतर लक्ष्य हासिल कर लिए गए.

स्टारशिप V3 का परीक्षण क्यों है खास?

स्टारशिप V3 रॉकेट लॉन्चिंग के इस परीक्षण को स्पेसएक्स इसलिए खास मान रही है क्योंकि इसी के जरिए कंपनी मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने की योजना पर काम कर रही है. एलन मस्क का सपना मंगल ग्रह‌ पर इंसानी बस्ती विकसित करने का है. इसके अलावा नासा के कार्यक्रमों के लिए भी इसका इस्तेमाल होगा. इस रॉकेट की खसियत है कि इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए स्पेस यात्रा काफी सस्ती और सुविधाजनक हो सकेगी. यह दुनिया का सबसे पावरफुल रॉकेट है और भारी-भरकम पेलोड लेकर अंतरिक्ष की उड़ान भर सकता है. रियूज होने से रॉकेट लॉन्चिंग इकोनॉमिकल हो जाएगी.