इस देश में मिला दुनिया का सबसे बड़ा शाकाहारी डायनासोर! 12 करोड़ साल पहले था धरती का राजा
थाईलैंड में वैज्ञानिकों ने दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े शाकाहारी डायनासोर 'नागाटायटन चइयाफूमेन्सिस' की खोज की है. करीब 27 टन वजनी यह विशाल जीव 10-12 करोड़ साल पहले धरती पर मौजूद था.
नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने साउथ-ईस्ट एशिया में अब तक का सबसे बड़ा लंबी गर्दन वाला शाकाहारी डायनासोर खोज निकाला है. थाईलैंड और ब्रिटेन के रिसर्चर्स ने हाल ही में इस अनोखी खोज का खुलासा किया है. इस विशालकाय डायनासोर को 'नागाटायटन चइयाफूमेन्सिस' नाम दिया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह थाईलैंड में मिलने वाली विशाल डायनासोर की आखिरी प्रजाति हो सकती है.
इस स्टडी को लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में पढ़ रहे थाईलैंड के एक पीएचडी छात्र थितिवूत सेथापनिचसाकुल ने लीड किया है. उन्होंने इसे थाईलैंड का 'आखिरी टाइटन' कहा है, क्योंकि वैज्ञानिकों को उम्मीद नहीं है कि देश में इससे कम उम्र की चट्टानों में अब और कोई डायनासोर के जीवाश्म मिलेंगे.
नाम के पीछे की कहानी और खोज
इस डायनासोर का नाम दो खास शब्दों को मिलाकर रखा गया है. नागा- दक्षिण-पूर्व एशियाई पौराणिक कथाओं का एक सांप जैसा जीव था. और टाइटन ग्रीक कहानियों के विशालकाय किरदार का नाम है. इस डायनासोर के अवशेष सबसे पहले साल 2016 में थाईलैंड के चइयाफुम प्रांत में रहने वाले स्थानीय लोगों को मिले थे.
ये हड्डियां एक तालाब के पास चट्टानों में दबी हुई थीं. बाद में रिसर्चर्स ने वहां खुदाई करके 10 हड्डियां बाहर निकालीं जिसमें आगे के पैर की एक भारी-भरकम हड्डी भी शामिल थी. यह हड्डी करीब 6 फीट लंबी थी. सेथापनिचसाकुल ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार इस पैर की हड्डी को देखा तो वो हैरान रह गए क्योंकि वह खुद उनसे भी ज्यादा लंबी थी.
कितना बड़ा था यह डायनासोर?
इस डायनासोर का वजन लगभग 27 टन यानी आज के एक अफ्रीकी हाथी से दोगुने से भी ज्यादा आंका जा रहा है.साथ ही यह भी माना जा रहा है कि यह करीब 10 से 12 करोड़ साल पहले क्रीटेशस काल के दौरान धरती पर राज करता था. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज सिर्फ इसके विशाल साइज की वजह से ही खास नहीं है बल्कि इससे थाईलैंड में जीवाश्म विज्ञान को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी. थाईलैंड में डायनासोर पर रिसर्च करीब 40 साल पहले ही शुरू हुई थी जो बाकी देशों के मुकाबले काफी देर से है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस शानदार खोज से युवा छात्र फॉसिल्स और प्राचीन इतिहास के बारे में जानने के लिए प्रेरित होंगे.
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