'सीजफायर जब तक नहीं होगा तब तक...', झुकने को राजी नहीं ईरान, ट्रंप के युद्ध खत्म करने के बयान पर कही ये बात
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अभी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक स्थायी समाधान और भविष्य में ऐसे संघर्ष की पुनरावृत्ति न होने की गारंटी नहीं मिलती.
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात पहले से अधिक गंभीर हो गए हैं. दोनों देशों के बयान इस ओर इशारा करते हैं कि फिलहाल युद्धविराम की संभावना बहुत कम है.
ईरान स्थायी शांति और सुरक्षा की गारंटी चाहता है. वहीं, अमेरिका अपने लक्ष्यों के करीब पहुंचने की बात कर रहा है. इस बीच रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बढ़ता जा रहा है.
ईरान का सख्त रुख
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अभी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक स्थायी समाधान और भविष्य में ऐसे संघर्ष की पुनरावृत्ति न होने की गारंटी नहीं मिलती, तब तक ईरान अपनी रक्षा जारी रखेगा. उनका कहना है कि ईरान केवल आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहा है.
अमेरिका का आक्रामक संकेत
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका अपने प्रमुख उद्देश्यों के करीब पहुंच चुका है. हालांकि, उन्होंने युद्धविराम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब एक पक्ष मजबूत स्थिति में हो, तब संघर्ष रोकना उचित नहीं होता. उनके बयान से साफ है कि अमेरिका अभी पीछे हटने के मूड में नहीं है.
नाटो पर तंज और सहयोगियों की आलोचना
ट्रंप ने नाटो देशों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने सहयोगी देशों को 'कमजोर' बताते हुए कहा कि बिना अमेरिका के नेतृत्व के यह गठबंधन प्रभावी नहीं है. यह बयान अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी असर डाल सकता है और पश्चिमी देशों के बीच मतभेद बढ़ा सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता खतरा
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति और संवेदनशील हो गई है. ईरान ने इसे केवल 'दुश्मन जहाजों' के लिए बंद बताया है. इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है.