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'ये हैं 165 बच्चों के हथियारे, इन्हें भूलना मत', ईरान ने दुनिया को दिखाई स्कूल पर मिसाइल गिराने वाले अमेरिकी अधिकारियों की तस्वीर

ईरानी पक्ष का कहना है कि इस हमले में बड़ी संख्या में निर्दोष बच्चों की मौत हुई, जिसे वह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और युद्ध अपराध बता रहा है.

@Iran_in_India
Anuj

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने मीनाब शहर में लड़कियों के स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले के लिए अमेरिकी नौसेना के दो अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है. इस हमले में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, जिनमें अधिकतर छात्राएं थी. घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और गहरा गया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसको लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

ईरान के मुताबिक, इस हमले में शामिल अधिकारियों की पहचान ली आर. टेट और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर जेफरी ई. यॉर्क के रूप में हुई है. ईरान का दावा है कि ये दोनों अधिकारी अमेरिकी युद्धपोत USS Spruance से जुड़े हैं और उन्होंने मिसाइल प्रक्षेपण की अनुमति दी थी. ईरानी दूतावासों ने भारत, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया में इन अधिकारियों की तस्वीरें और नाम सार्वजनिक करते हुए सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणियां भी की हैं.

टोमाहॉक मिसाइलें दागी

दूतावासों द्वारा किए गए पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि तीन अलग-अलग मौकों पर टोमाहॉक मिसाइलें दागी गई, जिनमें से एक हमले ने मीनाब के एक स्कूल को निशाना बना दिया. ईरानी पक्ष का कहना है कि इस हमले में बड़ी संख्या में निर्दोष बच्चों की मौत हुई, जिसे वह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और युद्ध अपराध बता रहा है. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. 

ईरानी विदेश मंत्री ने दी प्रतिक्रिया

इस मामले पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कहा कि यह हमला सुनियोजित था और इसमें जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया गया. उनके अनुसार, इन अपराधियों ने मीनाब में स्कूली बच्चों का नरसंहार किया. 

मीडिया रिपोर्ट में अलग तस्वीर

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में इस हमले को लेकर अलग तस्वीर भी सामने आई है. बताया गया है कि मिसाइल का असल निशाना स्कूल के पास स्थित एक सैन्य ठिकाना था, लेकिन पुराने या गलत खुफिया आंकड़ों के कारण लक्ष्य भटक गया और स्कूल इसकी चपेट में आ गया. अमेरिकी अधिकारियों ने इस घटना की जांच जारी होने की बात कही है और अभी तक अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है.

अमेरिका ने ईरान को ठहराया जिम्मेदार

वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में इस हमले के लिए ईरान को ही जिम्मेदार ठहराया था. उनका कहना था कि ईरान के हथियार सटीक नहीं होते. दूसरी ओर ईरान ने इस आरोप को खारिज करते हुए अमेरिका पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ गया है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है.