तालिबान ने अफगानिस्तान में सभी राजनीतिक दलों पर लगाया प्रतिबंध, बोला- शरिया में ऐसी कोई अवधारणा नहीं

Taliban: बैन करने को लेकर हवाला दिया गया कि शरिया कानून में राजनीतिक दलों की कोई अवधारणा नहीं है. अफगानिस्तान में तालिबान के दो साल पूरे हो चुके हैं.

Gyanendra Tiwari

नई दिल्ली. अफगानिस्तान में तालिबान का राज चलता है. गद्दी पर बैठे लोग जो फरमान सुनाते है लोग हों या फिर कोई राजनीतिक दल उन्हें मानना ही पड़ता है. तालिबान ने अफगानिस्तान में सभी पॉलिटिकल पार्टियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. 

बैन करने को लेकर हवाला दिया गया कि शरिया में राजनीतिक दलों की कोई अवधारणा नहीं है. अफगानिस्तान में तालिबान राज के दो साल पूरे हो चुके हैं. दो वर्ष पूरे होने के एक दिन बाद तालिबान ने ये फरमान सुनाया है.

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अफगानिस्तान में राजनीतिक दलों के प्रतिबंध की घोषणा राजधानी काबुल के एक संवाददाता सम्मेलन में की गई. इस प्रेस कांफ्रेंस को कानून मंत्री अब्दुल कीम शेरी ने किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि शरिया कानून के तहत राजनीतिक दलों की कोई अवधारणा नहीं है.

दलों पर पाबंदी लगाते हुए अब्दुल करीम शेरी ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां देश विरोधी है. देश इसकी सराहना नहीं करता है. शरिया में इसके बारे में किसी बात का जिक्र नहीं है.

तालिबान द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध पर वहां के स्थानियों ने कहा है कि इससे अफगानिस्तान को विदेशों से आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी. कोई भी देश तालिबान द्वारा लगाए गए इस फैसले को मान्य नहीं करेगा.

2021 तक अफगानिस्तान में 70 से अधिक छोटे और बड़े राजनीतिक दल थे लेकिन अमेरिकी फौज जाने के बाद तालिबान के कब्जे के बाद लोकतंत्र पर बैन लगा दिया गया है. हालांकि, तालिबान के कब्जे के बाद वहां लोकतंत्र कैद हो चुका था. कैद के दौरान जो हल्की-फुल्की हवा मिल रही थी वह गायब हो गई है.

सत्ता पर आने के बाद तालिबानियों ने अफगानिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे. इनमें छटी के बाद लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी भी शामिल है. सैलूनों पर रोक लगा दी गई. इसी तरह से तालिबान ने कई चीजों पर प्रतिबंध लगाया है. आए दिन वह इस तरह के प्रतिबंधघ लगाता रहता है.

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