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India Daily

पाकिस्तान के पुलिस स्टेशन पर आत्मघाती कार बम हमला, आम नागरिक बने निशाना; पांच लोगों की मौत

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में आतंकियों ने एक पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया. सुसाइड कार में रखें बम के धमाके से 5 लोगों की मौत हो गई. इस हमले में आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचा है.

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Edited By: Shanu Sharma
पाकिस्तान के पुलिस स्टेशन पर आत्मघाती कार बम हमला, आम नागरिक बने निशाना; पांच लोगों की मौत
Courtesy: X (@adamugarba)

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में स्थित डोमेल तहसील के एक पुलिस स्टेशन को निशाना बना गया. आत्मघाती कार बम हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, मरने वालों में तीन महिलाएं और एक नाबालिग बच्चा शामिल हैं.

हमले में कम से कम चार पुलिसकर्मी भी घायल हो गए, जबकि आसपास के कई घरों को भी काफी नुकसान पहुंचा है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को तेज रफ्तार से पुलिस स्टेशन की ओर बढ़ाया और उसे परिसर में घुसा दिया. इससे इतनी तेज धमाका हुआ कि पूरी तहसील में उसकी गूंज सुनाई दी. 

हमले में आम नागरिकों की मौत

शुरुआती जांच के मुताबिक हमलावर का मुख्य उद्देश्य पुलिस स्टेशन को नुकसान पहुंचाना था. हालांकि हमले के बाद बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और उन्होंने मलबे के बीच फंसे लोगों को बाहर निकाला. इस हमले में कई आम नागरिकों की मौत हो गई, जो इस हमले की बर्बरता को दर्शाता है. अभी भी आपातकालीन बचाव अभियान जारी है. स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है. इस हमले के बीच एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है.

अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस की 25 मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अभी भी विभिन्न आतंकवादी संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है. रिपोर्ट में विशेष रूप से उन समूहों का जिक्र किया गया जो भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर को लगातार निशाना बनाते रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना ने आतंकवादी समूहों के खिलाफ असंगत रणनीति अपनाई है. अधिकारियों ने देश के अंदर कुछ आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को खुलेआम सक्रिय रहने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए.

CRS रिपोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों का विशेष उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट पाकिस्तान की 'नेशनल एक्शन प्लान' का हवाला देते हुए कहती है कि इस योजना में साफ तौर पर किसी भी सशस्त्र मिलिशिया को काम करने की अनुमति न देने की बात कही गई थी, लेकिन जमीन पर इसका पालन नहीं हो रहा है. LeT अपने संदेश 'जमात-उद-दावा' के माध्यम से फैलाता रहता है।