सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने जंतर-मंतर पर जुलाई में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने इसे एक गंभीर चिंता का विषय बताया.
पूर्व सुरक्षा सचिव यशोवर्धन आजाद की पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि युवा आईपीएस अधिकारियों का खुद प्रदर्शनकारियों से मारपीट करना बेहद दुखद है. उन्होंने कहा कि पुलिस बल को बिना किसी अतिरिक्त बल के कानून का पालन कराना चाहिए.
जस्टिस भुइयां ने जोर दिया कि आम आदमी के लिए पुलिस राज्य का चेहरा होती है. पुलिस अपनी साख तभी बनाए रख सकती है जब वह संविधान का पालन करे, निष्पक्ष रहे और ईमानदारी व धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर काम करे.
VIDEO | New Delhi: "Police personnel assaulting protesters is distressing; it is a matter of grave concern," says Justice Ujjal Bhuyan on police action at Jantar Mantar, at the release of retired IPS officer Yashovardhan Azad's book 'Policing the Republic'. pic.twitter.com/BSF0qdY3Nn
— Press Trust of India (@PTI_News) September 4, 2026
उन्होंने देश में हिरासत में दी जाने वाली यातनाओं और मौतों पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने इसे एक सभ्य समाज का सबसे बुरा अपराध करार देते हुए पुलिस व्यवस्था में तत्काल सुधार और राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने की बात कही.
कुछ दिन पहले एनएलयू दिल्ली के दीक्षांत समारोह में जस्टिस भुइयां ने कहा था कि छात्रों को सवाल पूछने या अलग राय रखने पर दंडात्मक कार्रवाई की धमकी देना असंवैधानिक है. यह सत्ता का दुरुपयोग है.