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ईरान ने होर्मुज जलमार्ग में एक और जहाज को किया धुआं-धुआं, मचा रहा भारी तांडव; वीडियो में दिखा तबाही का मंजर

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर जहाजों पर हमले किए हैं. इससे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और मध्य पूर्व में बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल के हमलों में सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया है. ईरान का दावा है कि उसने अब तक छह जहाजों को निशाना बनाया है. यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का पांचवा हिस्सा संभालता है, इसलिए इसकी बंदी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खलबली मचा दी है. इस तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा संकट और महंगाई का बड़ा जोखिम पैदा कर दिया है.

ईरानी मीडिया के मुताबिक अब तक छह जहाजों को निशाना बनाया गया है. रविवार को ओमान के पास एक तेल टैंकर पर हमला हुआ. सोमवार को ब्रिटिश संस्था ने मस्कट और यूएई के पास जहाजों के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि की. ईरान ने आदेश दिया है कि अब किसी जहाज को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

तेल कीमतों में भारी उछाल 

इस बंदी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतें आसमान छूने लगी हैं. अमेरिकी तेल 7.4 प्रतिशत बढ़कर 71.97 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि ब्रेंट क्रूड में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. तेल आपूर्ति रुकने के डर से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में एक बड़े झटके की आशंका जताई जा रही है.

आठ देशों में ईरानी कार्रवाई 

खामेनेई की हत्या के प्रतिशोध में ईरान ने आठ देशों में अमेरिकी सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमले किए. इजरायल के साथ बहरीन, कतर, कुवैत, यूएई, इराक और जॉर्डन में लक्ष्यों को निशाना बनाया गया. तेहरान का कहना है कि यह उन हवाई हमलों का बदला है जिसमें उनके शीर्ष नेतृत्व की जान गई.

जहाजों के लिए सुरक्षा निर्देश 

अमेरिकी समुद्री प्रशासन ने जहाजों को होर्मुज क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दी है. अमेरिकी जहाजों को सैन्य बेड़ों से 30 समुद्री मील की दूरी बनाए रखने को कहा गया है ताकि कोई गलतफहमी न हो. खतरे को देखते हुए प्रमुख वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से अपनी आवाजाही फिलहाल रोक दी है.

जलमार्ग का रणनीतिक महत्व 

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा है. यह फारस की खाड़ी को खुले सागर से जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता है. इसकी बंदी का अर्थ है वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार. यदि यह गतिरोध बना रहा, तो दुनिया भर में ईंधन की भारी किल्लत और आर्थिक संकट गहरा सकता है.