नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्तों पर भी दिखने लगा है. यूएई से करीब 2,000 पाकिस्तानियों को जबरन वापस भेजे जाने की खबरों के बाद इस्लामाबाद में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान की संसद में भारी हंगामा भी हुआ जहां विपक्ष के नेताओं ने सरकार से तीखे सवाल पूछे और जवाब मांगा. इसी बीच ऐसी खबरें भी आई हैं कि यूएई ने पाकिस्तान से अपने कर्ज को जल्द से जल्द चुकाने के लिए कहा है.
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक जिन पाकिस्तानियों को यूएई से निकाला गया है न केवल उनकी नौकरी चली गई बल्कि उनके पैसे और सामान भी जब्त कर लिए गए. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान पहले से ही क्षेत्र में गंभीर आर्थिक और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है.
मौजूदा समय में लगभग 20 लाख पाकिस्तानी यूएई में काम करते हैं. ये प्रवासी मजदूर हर साल अरबों डॉलर अपने देश भेजते हैं जो पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. यही वजह है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को निकाले जाने से सरकार और आम जनता दोनों की चिंताएं बहुत बढ़ गई हैं.
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि पिछले पांच सालों में खाड़ी देशों खासकर सऊदी अरब और यूएई से करीब 1.64 लाख पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया है. अधिकारियों ने दावा किया कि इनमें से कुछ लोग आपराधिक गतिविधियों या भीख मांगने जैसे अवैध कामों में शामिल थे.
इस मुद्दे को लेकर गुरुवार को संसद में विपक्षी सांसदों और सरकार के बीच तीखी बहस हुई. विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह विदेशों में अपने नागरिकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह नाकाम रही है. बढ़ते हंगामे को देख प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने एलान किया कि विदेश मामलों की समिति इस पूरे मामले की बारीकी से जांच करेगी.
पाकिस्तान के 'डॉन' अखबार की रिपोर्ट के अनुसार विपक्षी सदस्यों ने कहा कि यूएई से निकाले जाने से पहले कई पाकिस्तानियों के साथ बुरा बर्ताव किया गया है. वहीं 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' में 8 मई को छपी एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सुरक्षा चिंताओं और जासूसी के डर से यूएई में काम करने वाले पाकिस्तानी शिया समुदाय के कुछ लोगों को वहां से हटाया जा रहा है. इस पूरी स्थिति ने दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.
UAE पाकिस्तान से 2 कारणों से नाराज है. पहला कारण है पाकिस्तान ने जंग के दौरान सऊदी अरब को सैन्य सहायता दी जबकि यूएई के लिए कोई स्टैंड नहीं लिया. और दूसरा कारण पाकिस्तान का मध्यस्थता का प्रयास है. पाकिस्तान ने जब सीजफायर कराने की पहल की तब उसने यूएई से कोई संपर्क नहीं किया.