अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद बदल गए स्कॉट बेसेंट के तेवर, भारत पर लगे टैरिफ को बताया था सही अब कही ये बात
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कुछ दिनों पहले भारत के खिलाफ सख्त बयान दिए थे. हालांकि अमेरिकी अदालत के टैरिफ फैसले के बाद उनके तेवर बदले नजर आ रहे हैं.
मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग में अमेरिका भी शामिल है. इजरायल के साथ मिलकर लगातार ईरान पर हमला कर रहा है. वहीं ईरान भी रूस की मदद से लगातार मुंह तोड़ जवाब दे रहा है. कुल मिलाकर अब तनाव वैश्विक रुप ले चुका है. इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के रुख बदल गए हैं.
बेसेंट दो महीने पहले तक भारत के खिलाफ सख्त बयान दे रहे थे, हालांकि अब उनका लहजा बदला-बदला नजर आ रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसके बाद उसपर चर्चा तेज हो गई है.
स्कॉट बेसेंट ने क्या कहा?
स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. हम सबसे बड़े उत्पादक, उपभोक्ता और रिफाइनर देशों के साथ मिलकर एनर्जी मार्केट में स्थिरता बनाए रखने का काम कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि यह साझा लक्ष्य है, अमेरिका सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरों को खत्म कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को धन्यवाद भी दिया. हालांकि उनका यह बयान दो महीने पहले दिए बयान से बिल्कुल अलग है. उस समय बेसेंट भारत पर लगातार हमला कर रहे थे. उन्होंने कहा था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में रूस को मदद कर रहा है. जिसके कारण ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया था. बेसेंट ने इसे सही भी ठहराया था.
वैश्विक एनर्जी मार्केट में मची उथल-पुथल
अमेरिका की अदालत ने ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी बताया है. इस फैसले से ट्रंप प्रशासन को गहरा झटका लगा है. हालांकि इससे पहले बेसेंट ने दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में भी रूसी तेल खरीदने वाले देशों को धमकाया था. उन्होंने कहा था कि सीनेटर लिंडसे ग्राहम का प्रस्ताव पास हुआ तो 500% टैरिफ लग सकता है. लेकिन अब मिडिल ईस्ट जंग ने तेल की कीमतें बढ़ा दी हैं.
वैश्विक एनर्जी मार्केट अस्थिर है, अमेरिका अब बड़े उपभोक्ता देशों को वैकल्पिक स्रोत खोजने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. इसी क्रम में बेसेंट अब टैरिफ की बजाय सहयोग की बात कर रहे हैं. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल इम्पोर्टर है. विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध लंबा चला तो तेल की कीमतें और बढ़ेंगी. ऐसे में भारत जैसे देशों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं.
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