क्या ईरान के साथ धोखा कर रहा था पाकिस्तान? सऊदी अरब के साथ किए गए सीक्रेट डिफेंस पैक्ट लीक, खुले कई पोल!

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए सीक्रेट समझौता से जुड़े कुछ पेपर लीक हो गए हैं. ऐसा तब हुआ जब इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता चल रही थी. जिसके बाद पाकिस्तान की मंशा पर सवाल उठने लगा है.

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Shanu Sharma

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच सितंबर 2025 में हुए गुप्त रक्षा समझौते के कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज लीक हो गए हैं. इस पूरी घटना में सबसे अजीब बात यही है कि यह खुलासा ठीक उसी समय हुआ, जब पाकिस्तान में ईरान और अमेरिकाके बीच शांति वार्ता की जा रही थी.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह खुलासा ठीक उसी समय हुआ, जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही थी. लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि दोनों देशों के बीच ‘कलेक्टिव डिफेंस’ का प्रावधान है. यह प्रावधान ठीक उसी प्रकार का है जो NATO के आर्टिकल 5 में है, यानी की एक पर हमला दोनों के खिलाफ माना जाएगा. 

अचानक सऊदी अरब ने की घोषणा

सऊदी अरब ने भी अचानक सार्वजनिक रूप से बताया कि पाकिस्तान वायुसेना के कई लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य संपत्तियां रियाद पहुंच चुकी हैं. सऊदी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह तैनाती पिछले साल सितंबर में हुए द्विपक्षीय रक्षा समझौते का हिस्सा है. विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब ने यह जानकारी जानबूझकर उसी समय जारी की, जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में मौजूद था. इसका मकसद ईरान के मन में पाकिस्तान की मंशा को लेकर संदेह पैदा करना हो सकता है. हालांकि इन सब के बीच शांति वार्ता विफल हो गई. 

लीक दस्तावेजों में सबसे बड़ा खुलासा

लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि किसी एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा. यानी यदि ईरान सऊदी अरब के तेल सुविधाओं, सैन्य ठिकानों या बुनियादी ढांचे पर हमला करता है तो पाकिस्तान सैन्य रूप से हस्तक्षेप करने के लिए बाध्य होगा. पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों को इस समझौते से बाहर रखने की मांग की थी, लेकिन सभी सैन्य संसाधनों के इस्तेमाल की बात शामिल है. हालांकि अभी तक दोनों देशों ने इस समझौते की शर्तों को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है और पाकिस्तानी संसद में भी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है. वर्तमान में हजारों पाकिस्तानी सैनिक पहले से ही सऊदी अरब में तैनात हैं. नए समझौते के तहत उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी और उन्हें कॉम्बैट रोल भी दी जा सकती है.