लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है. रूस ने शांति वार्ता पर बातचीत करने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को मॉस्को आने का न्योता दिया है. यह जानकारी क्रेमलिन की ओर से दी गई है. इस पहल को अमेरिका की अगुवाई में चल रही शांति कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की मध्यस्थता से रूस, यूक्रेन और अमेरिका के अधिकारियों की हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में बैठक हुई थी. इसके बाद माना जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और जेलेंस्की के बीच सीधी बातचीत की संभावना बढ़ी है. इन तीनों देशों के बीच अगली बैठक अबू धाबी में होने वाली है.
रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते की राह में अभी भी कई बड़ी अड़चनें हैं. इनमें सबसे अहम मुद्दे हैं क्षेत्रीय विवाद और यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी. यूक्रेन चाहता है कि भविष्य में उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो, जबकि रूस कुछ इलाकों पर अपने दावे छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहा.
क्रेमलिन के प्रवक्ता के अनुसार, अभी तक जेलेंस्की की ओर से इस न्योते पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है. माना जा रहा है कि यूक्रेन उस देश में जाने को लेकर असहज है, जो लगातार उस पर हमले कर रहा है. वहीं, कुछ रूसी अधिकारियों ने यह भी कहा कि जेलेंस्की की मॉस्को यात्रा के लिए सुरक्षा इंतजाम सबसे बड़ी चुनौती होंगे.
शांति वार्ता की कोशिशों के बावजूद रूस के हमले जारी हैं. हाल ही में रूस के ड्रोन हमले में यूक्रेन के दक्षिणी इलाके जापोरिज्जिया में तीन लोगों की मौत हो गई. कई इमारतों में आग लग गई और अन्य इलाकों में भी नुकसान की खबरें आईं.
जेलेंस्की ने कहा है कि रूसी हमले शांति वार्ता की प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि रूस एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है. उनके अनुसार, जब हमले जारी हैं, तब शांति की बातों पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है.
रूस का यह न्योता शांति की दिशा में एक संकेत जरूर माना जा रहा है, लेकिन लगातार हमले और गहरे मतभेद बताते हैं कि युद्ध का अंत अभी आसान नहीं है. आने वाले दिनों में होने वाली वार्ताएं यह तय करेंगी कि यह पहल सच में शांति की ओर कदम है या सिर्फ कूटनीतिक दबाव.