क्या मोदी-पुतिन की मुलाकात खोल सकती है यूक्रेन युद्ध में शांति की राह? भारत पर है ट्रंप और यूरोपीय संघ की नजर

पुतिन 4 और 5 दिसंबर को भारत आ रहे हैं और उनकी पीएम मोदी से मुलाकात पर यूरोप और अमेरिका की नजर है. यह मुलाकात यूक्रेन युद्ध में शांति की राह खोल सकती है.

@vladimirputiniu x account
Km Jaya

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले हफ्ते 4 और 5 दिसंबर को भारत आ रहे हैं. वे 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होगी. इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है क्योंकि भारत और रूस दोनों के अमेरिका के साथ संबंध हाल के समय में तनावपूर्ण रहे हैं. 

यूरोपीय संघ और अमेरिका भी इस मुलाकात को ध्यान से देख रहे हैं क्योंकि इसका असर सीधे उनके रणनीतिक हितों पर पड़ेगा. एक्सपर्ट मानते हैं कि यह बैठक सिर्फ रक्षा और व्यापार समझौतों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि यह वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है.

रिपोर्ट में क्या आया सामने?

रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन के इस दौरे से अमेरिका और यूरोप को राहत मिल सकती है. माना जा रहा है कि यह मुलाकात यूक्रेन युद्ध को खत्म करवाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है. यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है और जनता खुद को 2022 की तुलना में ज्यादा असुरक्षित और परेशान महसूस कर रही है. 

क्या निकलेगा यूक्रेन में शांत का रास्ता?

युद्ध पर होने वाला भारी खर्च यूरोप के लिए सिरदर्द बन चुका है. वहीं अमेरिका इस युद्ध पर टैक्सपेयर का पैसा खर्च करना बंद करने की सोच रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी और पुतिन की बातचीत से ऐसा प्रोसेस शुरू हो सकता है जो अगले 90 दिनों के अंदर यूक्रेन में शांति का रास्ता खोल सकता है. नरेंद्र मोदी लंबे समय से यूक्रेन में शांति का समर्थन कर रहे हैं. 

ट्रंप ने क्या दिया संकेत?

ट्रंप भी कई बार संकेत दे चुके हैं कि वह इस युद्ध से छुटकारा पाना चाहते हैं. ऐसे में भारत रूस शिखर सम्मेलन दुनिया के लिए उम्मीद का केंद्र बन गया है. रक्षा क्षेत्र में भी कई अहम समझौतों की उम्मीद है. भारत और रूस के बीच वर्षों पुराना सैन्य सहयोग एक बार फिर मजबूत हो सकता है.

किसे होगा सबसे बड़ा फायदा?

यदि इस मुलाकात से यूक्रेन में शांति की राह निकलती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा यूरोप और अमेरिका को होगा. इससे वहां बढ़ती हिंसा पर भी रोक लग सकती है. यूरोप में हाल ही के महीनों में हिंसा और अस्थिरता बढ़ी है जिसका सीधा संबंध यूक्रेन युद्ध से जुड़ी आर्थिक और सामाजिक परेशानियों से है. ऐसे में दिल्ली में होने वाला यह शिखर सम्मेलन दुनिया के लिए सकारात्मक संकेत बन सकता है.