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India Daily

रूस में युद्ध छोड़कर भागने वाले सैनिकों को पुतिन की क्रूर सजा, पेड़ से बांधकर सिर पर उल्टी बाल्टी और मुंह पर लातें ही लातें

इससे पहले मई में एक वीडियो सामने आया था जिसमें रूस के सैनिक यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने से मना करने वाले अपने साथियों को बेरहमी से प्रताड़ित करते हुए दिखाई दे रहे थे.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
रूस में युद्ध छोड़कर भागने वाले सैनिकों को पुतिन की क्रूर सजा, पेड़ से बांधकर सिर पर उल्टी बाल्टी और मुंह पर लातें ही लातें

रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए करीब साढ़े तीन साल होने जा रहे हैं. अमेरिका समेत दुनियाभर के तमाम देशों ने इस युद्ध को रोकने की भरसक कोशिश की लेकिन पुतिन ने यूक्रेन को पूरी तरह से तबाह करने की कसम खा ली है और वो इस जंग को खत्म होने को तैयार नहीं हैं.

हालांकि ऐसा लगता है रुस के सैनिक अब इस जंग से ऊब चुके हैं और शांति चाहते हैं. हाल ही में एक खबर सामने आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के कई सैनिक हैं जो इस जंग से पीछे हटना चाहते हैं या युद्ध के मैदान को छोड़ना चाहते हैं लेकिन ऐसे सैनिकों के साथ रूस में बर्बरता की जा रही है, उन्हें भयानक यातनाएं दी जा रही हैं.

रूसी सेना के लीक हुए फुटेज से खुली पोल

इस बात की पुष्टि हाल ही में सोशल मीडिया पर लीक हुए एक फुटेज से हुई है, जिसमें एक रूसी कमांडर को लड़ने से इनकार करने पर पेड़ से बांधकर पीटा जा रहा है. ये खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब रूस सैनिकों की संख्या को बढ़ाने के लिए तरह-तरह की रणनीतियां अपना रहा है.

मई में भी सामने आया था वीडियो

इससे पहले मई में एक वीडियो सामने आया था जिसमें रूस के सैनिक यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने से मना करने वाले अपने साथियों को बेरहमी से प्रताड़ित करते हुए दिखाई दे रहे थे.

सैकिन को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा

हाल ही में युद्ध लड़ने से मना करने पर एक सैनिक को पेड़ से बांध दिया गया और उसके सिर पर बाल्टी रख दी गई, फिर बाल्टी हटाने के बाद उसके चेहरे पर बार-बार लातें मारी जाती हैं.

एक अन्य वीडियो में एक सैनिक के चेहरे पर लातें मारते दिखाया गया है, उसके टखने एक जीप से बांध दिए गए हैं जो उसे पीछे घसीटते हुए ले जा रही है, जिसे हिंडोला कहा जाता है.

बार्सिलोना स्थित संगठन  (जो रूसी पुरुषों को सेना में भर्ती होने से बचाने और उन्हें भागने में मदद करता है) ने बताया कि डर और हिंसा ही वह चीज है जो रूसी सेना को चलायमान रखती है और उसे एकजुट रखती है. गेट लॉस्ट ने कहा कि इस युद्ध के छ महीने बाद से उसने 1700 लोगों को भागने में मदद की है.

गेस्ट लॉस्ट के संस्थापक ग्रिगोरी स्वेर्दलिन  ने कहा कि उनके लिए उनके कमांडरों की जिंदगी का कोई मूल्य नहीं है. उनके लिए एक टैंक या एक वाहन खोना 10-20 लोगों को खोने से अधिक बुरा है.

भागने पर 15 साल तक की जेल

अगर कोई सैनिक मोर्चे से भागता है तो उसे 15 साल तक की जेल हो सकती है.

अब तक 10 लाख रूसी सैनिकों की मौत

सामरिक और अंतरराष्ट्रीय स्टडी सेंटर की जून की एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2022 में जब मास्को ने यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण कियाथा तब से लगभग 10 लाख रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं. नाटो का अनुमान है कि अकेले 2025 में 1 लाख रूसी कर्मचारी मारे जाएंगे.