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पुतिन का बढ़ रहा चीन प्रेम; भारत से हुई जंग तो किसका साथ देगा रूस?

Putin 19th Visit To China: रूस के राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन अपनी 19वीं चीन यात्रा पर हैं. पुतिन के दौरे पर भारत समेत पश्चिमी देशों की नजर है. पश्चिमी देशों को उम्मीद है कि शी जिनपिंग, पुतिन को यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए प्रेरित करेंगे. भारत भी मॉस्को और बीजिंग के बीच संबंधों पर करीब से नजर रख रहा है

India Daily Live

Putin 19th Visit To China: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ने गुरुवार को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में मुलाकात की. यहां पुतिन को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया. जिनपिंग को अपना दोस्त बताते हुए पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के बीच संबंध अवसरवादी नहीं हैं. वहीं, शी जिनपिंग ने कहा कि चीन-रूस की दोस्ती स्थायी है और ये नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक मॉडल बन गई है. बाद में दोनों नेताओं ने राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक म्यूजिकल प्रोग्राम में पहुंचे.

पुतिन की दो दिवसीय चीन यात्रा तब हो रही है जब रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जारी जंग पर मजबूत पकड़ बना ली है. शी जिनपिंग अभी यूरोप के दौरे से लौटे हैं, जहां उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ-साथ हंगरी और सर्बिया के नेताओं से मुलाकात की, ये दोनों पुतिन के मित्र हैं.

चीन, रूस और युद्ध

24 फरवरी, 2022 को रूस की ओर से यूक्रेन पर आक्रमण करने से कुछ दिन पहले ही चीन और रूस ने 'नो-लिमिट' स्ट्रेटेजिक पार्टनरशीप पर साइन किए थे. दो साल से अधिक समय के बाद, रूस अब यूक्रेनी क्षेत्र के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है. उधर, यूक्रेन के खिलाफ रूस की ओऱ से जारी जंग में चीन की भूमिका ने अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की टेंशन बढ़ाती रही है. अमेरिका के मुताबिक, चीन के समर्थन के बिना रूस, यूक्रेन पर हमले के दौरान हथियारों के लिए संघर्ष कर रहा है. अमेरिका का ये भी दावा है कि चीन अब रूस को उस टेक्निक की आपूर्ति कर रहा है, जिसका यूज रूस की ओर से मिसाइलों, टैंकों और अन्य हथियारों को बनाने में किया रहा है.

चीन से मशीन टूल्स, कंप्यूटर चिप्स और अन्य वस्तुओं का रूसी आयात काफी बढ़ गया है. युद्ध शुरू होने के बाद से रूस को चीनी रसद उपकरण जैसे लॉरी (सैनिकों को ले जाने के लिए) और उत्खनन करने वालों (खाईयां खोदने के लिए) की बिक्री चार से सात गुना बढ़ गई है.

पुतिन से अब तक 40 बार मिल चुके हैं जिनपिंग

पुतिन से जिनपिंग अब तक 40 से अधिक बार मिल चुके हैं. साल 2000 के बाद से पुतिन की ये 19वीं चीनी यात्रा है. रूस के राष्ट्रपति के रूप में 6 साल का नया कार्यकाल शुरू करने के बाद पुतिन की ये पहली विदेश यात्रा है. पश्चिम को उम्मीद है कि युद्ध समाप्त करने के लिए शी पुतिन के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करेंगे. रूस के साथ रणनीतिक संबंधों को गहरा करने वाले एक बयान पर हस्ताक्षर करते हुए शी ने गुरुवार को कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि यूक्रेन संकट का राजनीतिक समाधान सही दिशा है.

पुतिन ने कहा कि वे संकट को हल करने की कोशिश के लिए चीन के आभारी हैं और उन्होंने कहा कि वे शी को यूक्रेन की स्थिति के बारे में जानकारी देंगे, जहां रूसी सेनाएं कई मोर्चों पर आगे बढ़ रही हैं. 

भारत के लिए गंभीर चिंताएं?

पुतिन और जिनपिंग की मुलाकात के बाद भारत के लिए चिंताएं बढ़ गईं हैं. लगभग 60-70% भारतीय रक्षा आपूर्ति रूस से आती है. फिलहाल, भारत को रेग्यूलर और विश्वसनीय आपूर्ति की आवश्यकता है, खासकर ऐसे समय में जब भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पिछले चार साल से सीमा पर गतिरोध चल रहा है.

कई पश्चिमी विश्लेषकों ने भारत को ऐसे परिदृश्य के बारे में आगाह किया है जिसमें रूस चीन का जूनियर पार्टनर बन जाएगा. साथ ही, भारत नहीं चाहेगा कि पश्चिमी प्रतिबंधों के परिणामस्वरूप रूसी रक्षा उद्योग को नुकसान हो.

यदि भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ गया तो रूस क्या करेगा? 1962 के युद्ध के दौरान सोवियत संघ की स्थिति भारत के प्रति विशेष रूप से सहायक नहीं थी. 1971 के युद्ध के दौरान मास्को ने अपना समर्थन दिया था. हालांकि, ये न तो 1962 और न ही 1971 और व्लादिमीर पुतिन का रूस पुराना सोवियत संघ भी नहीं है.