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H-1B समेत इन वीजा श्रेणियों की बढ़ेगी प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस, जानें कब से लागू होगी नई दरें

अमेरिका में प्रीमियम वीजा प्रोसेसिंग फीस बढ़ाई जा रही है. यह बढ़ोतरी 1 मार्च 2026 से लागू होगी और H-1B सहित कई वीजा श्रेणियों पर असर डालेगी, जबकि सामान्य फीस में कोई बदलाव नहीं होगा.

Anuj
Edited By: Anuj
H-1B समेत इन वीजा श्रेणियों की बढ़ेगी प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस, जानें कब से लागू होगी नई दरें

नई दिल्ली: अमेरिका में काम करने या पढ़ाई करने की योजना बना रहे विदेशी नागरिकों के लिए अहम खबर है. यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज ने कई वीजा श्रेणियों की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस बढ़ाने का फैसला किया है. यह बदलाव केवल उन आवेदकों पर लागू होगा, जो तेजी से आवेदन निपटाने की सुविधा चुनते हैं. नई दरें 1 मार्च 2026 से प्रभावी होंगी और बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों व छात्रों को प्रभावित कर सकती हैं.

प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में बढ़ोतरी

USCIS ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल प्रीमियम प्रोसेसिंग विकल्प के लिए है. सामान्य वीजा आवेदन शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है. प्रीमियम प्रोसेसिंग का इस्तेमाल आमतौर पर वे लोग करते हैं, जिन्हें अपने वीजा या आवेदन पर जल्दी फैसला चाहिए होता है, जैसे नौकरी बदलने या यात्रा की स्थिति में.

H-1B और अन्य वीजा पर असर

संशोधित शुल्क के अनुसार, Form I-129 के तहत आने वाले कई नॉन-इमिग्रेंट वीजा की फीस बढ़ेगी. इसमें H-1B, L-1, O-1, P और TN जैसी श्रेणियां शामिल हैं. इन वीजा के लिए प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस अब 2,805 डॉलर से बढ़कर 2,965 डॉलर हो जाएगी.

इमिग्रेंट वीजा और स्टूडेंट आवेदन

रोजगार आधारित इमिग्रेंट वीजा के लिए Form I-140 की प्रीमियम फीस भी बढ़ाकर 2,965 डॉलर कर दी गई है. इसके अलावा, छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स से जुड़े Form I-539 आवेदन की फीस 1,965 डॉलर से बढ़कर 2,075 डॉलर होगी. इसमें F, J और M कैटेगरी शामिल हैं.

वर्क परमिट के लिए भी ज्यादा शुल्क

जो लोग अपना वर्क परमिट जल्दी पाना चाहते हैं, उनके लिए भी खर्च बढ़ेगा. Form I-765 के तहत आने वाले OPT और STEM-OPT आवेदनों की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस अब 1,685 डॉलर से बढ़कर 1,780 डॉलर हो जाएगी. यह बदलाव खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों को प्रभावित करेगा.

भारतीय आवेदकों पर ज्यादा असर

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ने की संभावना है. भारतीय पेशेवर H-1B और L-1 जैसे वीजा में सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं. हर साल मंजूर होने वाले रोजगार आधारित वीजा में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीयों को मिलते हैं. इसलिए फीस बढ़ोतरी उनके लिए एक अहम बदलाव मानी जा रही है.