दक्षिण सूडान में विमान हुआ क्रैश, चालक सहित सभी 14 यात्रियों की मौत; इस वजह से हुआ हादसा
दक्षिण सूडान के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, राजधानी जूबा के बाहरी इलाके में सोमवार को एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में सभी 13 यात्रियों और पायलट की मौत हो गई.
नई दिल्ली: दक्षिण सूडान के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, राजधानी जूबा के बाहरी इलाके में सोमवार को एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में सभी 13 यात्रियों और पायलट की मौत हो गई.
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण यह दुर्घटना हुई. अधिकारियों ने बताया कि विमान में सवार लोगों में दो केन्याई नागरिक थे, जबकि बाकी दक्षिण सूडान के निवासी थे. घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है. प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
विमानन प्राधिकरण द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सिटीलिंक एविएशन के इस विमान ने स्थानीय समयानुसार सुबह 09:15 बजे रनवे से उड़ान भरी थी. उड़ान के शुरुआती मिनटों तक सब कुछ सामान्य प्रतीत हो रहा था. लेकिन ठीक 09:43 बजे हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) से विमान का संपर्क अचानक टूट गया. लैंडिंग से कुछ समय पहले ही विमान रडार से गायब हो गया. जिसके बाद जुबा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हड़कंप मच गया और तत्काल खोज अभियान शुरू किया गया.
राहत बचाव कार्य और मलबे की स्थिति
घटना की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने विशेषज्ञों और आपातकालीन सेवाओं की एक टीम को तत्काल घटनास्थल पर रवाना किया. सोशल मीडिया पर साझा किए गए दुर्घटनास्थल के वीडियो में दिल दहला देने वाले दृश्य दिखाई दे रहे हैं. विमान का मलबा पूरी तरह से आग की लपटों में घिरा हुआ है. पहाड़ी और धुंध भरे इलाके में बिखरा हुआ विमान का ढांचा इस बात की गवाही दे रहा है कि टक्कर कितनी जोरदार रही होगी. बचाव दल साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.
सुरक्षा मानकों और जांच पर जोर
इस त्रासदी के बाद दक्षिण सूडान के उड्डयन सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है. प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि एक उच्च-स्तरीय टीम दुर्घटना की विस्तृत जांच करेगी ताकि तकनीकी पहलुओं को समझा जा सके. सिटीलिंक एविएशन के संचालन और विमान के रखरखाव के रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी. खराब मौसम में छोटे विमानों के संचालन के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया गया है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों या तकनीकी खामियों से बचा जा सके.
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