नई दिल्ली: जापान में रविवार को हुए विंटर स्नैप चुनाव में प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बड़ी और ऐतिहासिक जीत हासिल की है. सानाए ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं. उन्होंने कई बार कहा है कि वह ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर, जिन्हें 'आयरन लेडी' कहा जाता था, से प्रेरणा लेती हैं.
चुनाव नतीजों के शुरुआती रुझानों में ही साफ हो गया था कि सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को जनता का जबरदस्त समर्थन मिला है. जापान की संसद के निचले सदन में कुल 465 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 233 सीटों की जरूरत होती है. एलडीपी ने अकेले ही इस जादुई आंकड़े को पार कर लिया. यह उपलब्धि पार्टी के लिए बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि यह उसके अब तक के सबसे शानदार चुनावी प्रदर्शनों में शामिल है.
इस जीत से सानाए ताकाइची की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है. उन्हें एक सख्त फैसले लेने वाली और काम को प्राथमिकता देने वाली नेता के तौर पर देखा जाता है. स्नैप चुनाव कराने का उनका फैसला जोखिम भरा माना जा रहा था, लेकिन नतीजों ने साबित कर दिया कि जनता ने उन पर भरोसा जताया है. इस जनादेश के साथ अब वह अपने नीतिगत एजेंडे को ज्यादा मजबूती से आगे बढ़ा सकेंगी.
सानाए ताकाइची की जीत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आई हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें इस बड़ी सफलता पर बधाई दी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ताकाइची के नेतृत्व में भारत और जापान के रिश्ते और मजबूत होंगे. यह चुनावी जीत न सिर्फ जापान की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी देश की दिशा और नीतियों को लेकर अहम मानी जा रही है.
ताकाइची का गठबंधन न सिर्फ बहुमत बल्कि दो तिहाई से ज्यादा सीटें भी हासिल कर सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह उनकी सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक ताकत साबित होगी. दो तिहाई बहुमत मिलने पर सरकार को अहम कानून पास कराने में ऊपरी सदन की रुकावटों का सामना नहीं करना पड़ेगा. इससे प्रधानमंत्री को अपने एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा.
एग्जिट पोल में जिस तरह के आंकड़े सामने आए हैं, उनसे साफ है कि ताकाइची की पार्टी को चुनाव से पहले की तुलना में बड़ा फायदा हुआ है. यह उछाल उन्हें दक्षिणपंथी नीतियों को आगे बढ़ाने का रास्ता खोल सकता है. इन नीतियों में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच जापान की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और सैन्य क्षमताओं को बढ़ाना शामिल है. इसके साथ ही ताकाइची अमेरिका के साथ रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करना चाहती हैं, खासकर वाशिंगटन के साथ सुरक्षा सहयोग को लेकर.
सनाए ताकाइची ने अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था. प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने स्नैप चुनाव कराने का फैसला लिया. माना जा रहा है कि उन्होंने यह कदम अपनी लोकप्रियता को भुनाने के लिए उठाया, ताकि समय के साथ समर्थन में संभावित गिरावट से पहले मजबूत जनादेश हासिल किया जा सके. हालांकि, उनकी पार्टी एलडीपी को फंडिंग और धार्मिक संगठनों से जुड़े पुराने विवादों का सामना भी करना पड़ा है.
ताकाइची की छवि एक सख्त लेकिन मेहनती नेता की है. उन्होंने सत्ता संभालते ही 'काम, काम, काम' का नारा दिया, जो खासकर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ. उनकी स्पष्ट बात करने की शैली और तेज फैसले लेने का अंदाज उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है. हालिया सर्वेक्षणों में भी एलडीपी के लिए बड़ी जीत की संभावना जताई गई थी, जबकि विपक्षी दल बिखरे हुए नजर आए और कोई मजबूत चुनौती पेश नहीं कर सके.
प्रधानमंत्री ताकाइची की नीतियों का मुख्य फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा, आप्रवासन और रक्षा सुधारों पर है. उन्होंने सुरक्षा और रक्षा नीतियों में बदलाव का वादा किया है, जिसमें हथियार निर्यात से जुड़े नियमों में ढील और पारंपरिक शांतिवादी सोच से दूरी बनाना शामिल है. इसके अलावा, विदेशियों को लेकर सख्त नियम, जासूसी विरोधी कानून और रक्षा खर्च बढ़ाने जैसे मुद्दे भी उनके एजेंडे में हैं. समर्थकों का मानना है कि ये कदम जापान को मजबूत बनाएंगे, जबकि आलोचक चेतावनी दे रहे हैं कि इससे नागरिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है.