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पाकिस्तान ने भी कबूला अपना गुनाह, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करते हैं पाकिस्तानी!

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान में कोई भी धार्मिक अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों पर जुल्म ढाया जाता है. मैं अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे पर बात करना चाहता हूं लेकिन विपक्ष मुझे ऐसा नहीं करने देता है.

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Khawaja Asif
Courtesy: SOCIAL MEDIA

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में एक सत्र के दौरान देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कबूल किया कि अल्पसंख्यकों को धर्म के नाम पर हिंसा का सामना करना पड़ रहा है. अल्पसंख्यकों की हर दिन हो रही हत्याओं पर चिंता जताते हुए ख्वाजा ने कहा, 'रोजाना अल्पसंख्यकों को मारा जा रहा है, इस्लाम की आड़ में अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित नहीं हैं. मैं अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे पर बात करना चाहता हूं लेकिन विपक्ष मेरी कोशिशों को रोक रहा है. पाकिस्तान वैश्विक शर्मिंदगी का सामना कर रहा है'.

आसिफ ने जोर देकर कहा कि सवैंधानिक सुरक्षा के बावजूद पाकिस्तान में इस्लाम के अंतर्गत आने वाले छोटे संप्रदायों सहित कोई भी धार्मिक अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है. ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली के सत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव की अपील की, जिसमें कहा गया कि हिंसा के कई पीड़ितों का ईशनिंद के आरोपों से कोई संबंध नहीं था, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत प्रतिशोध के कारण निशाना बनाया गया.

'देश में छोटे संप्रदाय भी सुरक्षित नहीं हैं...'

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री आसिफ ने कहा कि देश में छोटे संप्रदाय भी सुरक्षित नहीं हैं, जो कि एक बेहद शर्मनाक स्थिति है. इस दौरान ख्वाजा ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव की मांग की. उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हमारा संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गारंटी देता है, बावजूद विभिन्न स्थानों पर हिंसा की घटनाएं हो रही है. ईशनिंदा के मामले में जबरदस्ती लोगों को फंसाना और फिर उनकी हत्या करना, ये पाकिस्तान में आम बात हो गई. इस तरह के कदम से वहां के हर समुदाय में दहशत का माहौल बना रहता है.

क्या कहती है HRCP की रिपोर्ट?

ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) और ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में हिंदू, सिख और अन्य अल्पसंख्यकों को जबरन धर्म परिवर्तन, अपहरण, हत्या और उनके पूजा वाले स्थानों पर हमला किया जाता है. उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जाता है. उन पर ईशनिंदा के भद्दे आरोप लगाए जाते हैं. अल्पसंख्यक समुदाय सामाजिक और कानूनी उत्पीड़न के प्रति संवेदनशील बना हुआ है.