पाकिस्तान में ये क्या चल रहा? ईरान-US शांति वार्ता से पहले मिडिल ईस्ट में क्यों भेजे लड़ाकू विमान

इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण शांति वार्ता होनी है. पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा के लिए 'आयरन एस्कॉर्ट' अभियान शुरू किया है. यह वार्ता क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए निर्णायक मानी जा रही है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और दो सप्ताह के अस्थायी संघर्षविराम के बीच पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद पर टिकी हैं. शनिवार को होने वाली इस ऐतिहासिक शांति वार्ता में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि आमने-सामने होंगे. पाकिस्तान इस आयोजन को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता. इस कूटनीतिक पहल का उद्देश्य तेहरान में हुई भीषण तबाही के बाद एक स्थायी समझौते तक पहुंचना है. हालांकि इजरायल और पाकिस्तान के बीच बढ़ती जुबानी जंग ने माहौल को और भी पेचीदा बना दिया है.

ईरानी प्रतिनिधिमंडल को संभावित खतरों से बचाने के लिए पाकिस्तानी वायुसेना ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. 'आयरन एस्कॉर्ट' मिशन के तहत बंदर अब्बास से इस्लामाबाद तक JF-17 और F-16 लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं. इसके अलावा AWACS विमानों के जरिए फारस की खाड़ी तक हवाई क्षेत्र की निगरानी की जा रही है. स्रोतों के अनुसार ईरान संकट ने पहले ही वैश्विक विमानन क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे दुबई जैसे बड़े केंद्रों पर उड़ानों की संख्या सीमित हो गई है.

कूटनीति के केंद्र में इस्लामाबाद 

8 अप्रैल को चीन के सहयोग से हुए संघर्षविराम के बाद अब पाकिस्तान स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करना चाहता है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस चर्चा के लिए रवाना हो चुके हैं. जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री और संसद अध्यक्ष शिरकत करेंगे. इस संकट की वजह से भारतीय एयरलाइंस को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि दुबई ने अपनी उड़ानों पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं. पाकिस्तान अब इस मध्यस्थता के जरिए अपनी क्षेत्रीय स्थिति मजबूत करना चाहता है.

इजरायल और पाकिस्तान में तकरार 

शांति वार्ता से ठीक पहले पाकिस्तान और इजरायल के बीच तीखी बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक विवादित बयान पर बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. यद्यपि आसिफ ने अपना बयान वापस ले लिया है, लेकिन जमीनी तनाव कम नहीं हुआ है. स्रोतों के मुताबिक इसी युद्ध के कारण पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबे और महंगे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है

वार्ता के मार्ग में नई अड़चनें 

अंतिम समय में कुछ तकनीकी और राजनीतिक बाधाओं ने वार्ता पर संशय के बादल बढ़ा दिए हैं. विशेष रूप से लेबनान में जारी हमलों को लेकर ईरानी पक्ष अभी भी कशमकश में है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी दल ने अब तक उड़ान नहीं भरी है. ईरान चाहता है कि लेबनान में भी तुरंत बमबारी रुके. जानकारी के अनुसार युद्ध की इसी अनिश्चितता ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे दुनिया के व्यस्ततम केंद्रों के परिचालन को भी सीमित कर दिया है.

वैश्विक विमानन और शांति की उम्मीद 

प्रोफेसर इश्तियाक अहमद का मानना है कि इन वार्ताओं का परिणाम न केवल राजनीति बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करेगा. वर्तमान में विमानन कंपनियां ईंधन की बढ़ती कीमतों और लंबे रास्तों से जूझ रही हैं. यदि इस्लामाबाद में शांति बहाल होती है, तो इससे न केवल हजारों जानें बचेंगी बल्कि विमानन क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिल सकती है. फिलहाल. दुनिया एक सांस रोककर शनिवार के परिणामों का इंतजार कर रही है, जिससे भविष्य की दिशा तय होगी.