कंगाल होता पाकिस्तान, 11 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची गरीबी; शहबाज सरकार के दावों की खुली पोल
पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली ने पिछले एक दशक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. आधिकारिक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में गरीबी 11 साल के उच्चतम स्तर 29% पर पहुंच गई है, जबकि आय की असमानता ने 27 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. करीब 7 करोड़ लोग दाने-दाने को मोहताज हैं.
नई दिल्ली: पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है. शुक्रवार को योजना मंत्री अहसन इकबाल द्वारा जारी एक आधिकारिक सर्वेक्षण ने देश की बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में गरीबी का अनुपात 11 साल के उच्चतम स्तर 29 प्रतिशत पर पहुंच गया है. 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की लगभग 7 करोड़ आबादी अब 'अत्यधिक गरीबी' (extreme poverty) के दायरे में जीवन यापन कर रही है.
वित्त वर्ष 2024-25 के प्रारंभिक निष्कर्ष बताते हैं कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की वर्तमान सरकार के पहले ही वर्ष में गरीबी का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर चढ़ा है. 2019 में जो गरीबी दर 21.9% थी, वह अब बढ़कर 28.9% हो गई है. यह 2014 के बाद का सबसे खराब स्तर है. केवल गरीबी ही नहीं, बल्कि आय की असमानता भी 32.7 के स्तर पर पहुंच गई है, जो पिछले 27 वर्षों (1998 के बाद) में सबसे अधिक है.
प्रांतों का हाल: बलूचिस्तान और सिंध में हाहाकार
पाकिस्तान में गरीबी को लेकर हुए सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 28.2% से बढ़कर 36.2% हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 11% से बढ़कर 17.4% पर पहुंच गई है. प्रांतीय स्तर पर स्थिति और भी भयावह है:
• पंजाब: 16.5% से बढ़कर 23.3%
• सिंध: 24.5% से बढ़कर 32.6%
• खैबर-पख्तूनख्वा: 28.7% से बढ़कर 35.3%
• बलूचिस्तान: 42% से बढ़कर 47%
महंगाई और IMF की शर्तों ने तोड़ी जनता की कमर
पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसन इकबाल ने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रम से जुड़ी 'स्थिरीकरण नीतियों' ने देश की जनता की मुश्किलें बढ़ाई हैं. बिजली-गैस पर सब्सिडी की वापसी और मुद्रा के अवमूल्यन ने महंगाई को बेकाबू कर दिया है. पिछले सात वर्षों में परिवारों की वास्तविक मासिक आय 12% गिरकर 31,127 रूपये रह गई है, जबकि बेरोजगारी दर 21 साल के उच्चतम स्तर 7.1% पर पहुंच गई है. मंत्री ने कहा कि बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम जैसे नकद हस्तांतरण समाधान नहीं हैं, बल्कि देश को विकास और धन सृजन की आवश्यकता है.
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