परमाणु हथियारों को लेकर दुनिया में सबसे बड़ा डर उनकी संख्या नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में उनके इस्तेमाल का है. कनाडाई शिक्षाविद और भू-राजनीतिक विश्लेषक जियांग ज़ुएक़िन ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इसी सवाल पर अपनी राय रखी.
उन्होंने कहा कि अपने जीवनकाल में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना उन्हें बेहद कम लगती है. हालांकि, अगर कभी ऐसा हुआ तो उन्होंने भारत-पाकिस्तान क्षेत्र को संभावित केंद्र बताया और पाकिस्तान का नाम आगे रखा
जियांग के अनुसार, पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक कमजोरियां परमाणु संकट के दौरान जोखिम बढ़ा सकती हैं. उनका तर्क है कि भारत की पारंपरिक सैन्य क्षमता ज्यादा व्यापक है, जबकि पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों को अपनी सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका दी है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं कहा कि पाकिस्तान किसी परमाणु हमले की तैयारी कर रहा है. उनकी बात संभावित युद्ध की बेहद गंभीर स्थिति से जुड़ी थी.
भारत और पाकिस्तान की परमाणु नीतियों में बड़ा अंतर है. भारत ने लंबे समय से पहले परमाणु हमला नहीं करने की नीति अपनाई है, हालांकि इस पर समय-समय पर चर्चा होती रही है. पाकिस्तान ने ऐसी नीति नहीं अपनाई है और अपनी परमाणु रणनीति में अस्पष्टता बनाए रखी है. इसी अंतर को जियांग अपने आकलन का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं. उनका कहना है कि दोनों देशों की सैन्य और रणनीतिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं.
भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान के नेताओं की परमाणु टिप्पणियां कई बार सामने आई हैं. 2019 के तनाव के बाद भी परमाणु संघर्ष की आशंकाओं को लेकर बयान दिए गए थे. मई 2025 के सैन्य टकराव के दौरान भी ऐसी भाषा सुनाई दी. हालांकि पाकिस्तानी नेतृत्व ने बाद में स्पष्ट किया कि उसका परमाणु कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा और निवारक क्षमता के लिए है. पाकिस्तान खुद को जिम्मेदार परमाणु शक्ति बताता रहा है.
जियांग का आकलन किसी आसन्न परमाणु युद्ध की घोषणा नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि अपने जीवनकाल में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना उन्हें लगभग शून्य लगती है. उनकी चिंता केवल उस स्थिति को लेकर है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक संघर्ष बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच जाए. ऐसे हालात में परमाणु हथियार निवारण के बजाय अंतिम विकल्प के रूप में देखे जाने लग सकते हैं.