अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता के बीच पाकिस्तान के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. ट्रंप ने पाकिस्तान समेत अन्य अरब और मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की है. उनका मानना है कि इससे भविष्य में मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित होगी.
ट्रुथ सोशल पर अपनी इस कोशिश के बारे में बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि अमेरिका ने एक बहुत ही जटिल पहेली को सुलझाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत की है. उन्होंने कहा कि अब प्रमुख मुस्लिम-बहुल देशों को इजरायल के साथ अपने संबंधों को औपचारिक रूप से सामान्य बनाना चाहिए.
डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि सऊदी अरब और कतर को तुरंत हस्ताक्षर कर देने चाहिए. इस समझौते पर देशों को एकमत करने के लिए उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वॉशिंगटन के साथ अंतिम शांति समझौता होने के बाद, ईरान भी इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है. उन्होंने कहा कि इस बेजोड़ वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बनना ईरान के लिए भी एक सम्मान की बात होगी. ट्रंप ने इस प्रस्तावित गठबंधन को भविष्य का एक वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक उछाल बताया, जो मध्य पूर्व को एकजुट, शक्तिशाली और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम योगदान निभा सकता है.
पाकिस्तान की ओर से ट्रंप के इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया गया. इस्लामाबाद की ओर से कहा गया कि इजरायल पर उसकी लंबे समय से चली आ रही नीति में कोई बदलाव नहीं होगा. पाकिस्तान ने कहा कि ऐसी मांगों को मानने के लिए उस पर कोई दबाव नहीं है. उन्होंने कहा कि इजरायल को मान्यता देना, एक संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र के निर्माण से जुड़ा हुआ है.
पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि इजरायल को तब तक मान्यता नहीं दी जाएगी, जब तक 1967 से पहले की सीमाओं पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना नहीं हो जाती. बता दें कि अब्राहम समझौता एक ऐसा समझौता है जो अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और कई अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने का काम करता है. अब अगर पाकिस्तान इस समझौते के लिए तैयार हो जाता है तो उसे अपने पासपोर्ट बदलने पड़ सकते हैं. क्योंकि पाकिस्तानी पासपोर्ट से इजरायल की यात्रा नहीं की जा सकती है.