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वार्ता से पहले डर का माहौल! ईरान को नहीं है पाकिस्तान पर भरोसा, इस्लामाबाद भेजे कई नकली विमान; सिर्फ एक में डेलिगेशन

ईरान ने पाकिस्तान में वार्ता के लिए सुरक्षा कारणों से कई नकली विमान भेजे. लेबनान और होर्मुज जैसे मुद्दों के कारण बातचीत से पहले ही तनाव बना हुआ है.

@Rizvana_Raza and @ShrutiDhore x account
Km Jaya

नई दिल्ली: पाकिस्तान आतंकवाद का पर्याय बन गया है. यही वजह है कि ईरान जैसा मुस्लिम देश भी उस पर भरोसा नहीं करता. हालांकि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का मुख्य केंद्र होने का दावा करता है लेकिन जो सच्चाई सामने आ रही है, वह कुछ और ही बताती है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान में रहते हुए ईरान को हवाई हमले का डर था. जिसके वजह से अपने वार्ताकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान ने इस्लामाबाद कई नकली विमान भेजे, जिनमें से असली प्रतिनिधिमंडल सिर्फ एक में सवार था.

कौन कर रहा ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व?

ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ कर रहे हैं, जो हाल ही में ईरानी सरकार में एक प्रमुख हस्ती के तौर पर उभरे हैं. प्रतिनिधिमंडल में ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं.

विमान की आगे की सीटें क्यों थीं खाली?

इस्लामाबाद जाते समय गालिबफ ने अपने विमान की आगे की सीटें खाली रखीं. इन खाली सीटों पर 'मिनाब स्कूल हमले' में मारे गए बच्चों और पीड़ितों की तस्वीरें और निजी सामान जैसे स्कूल बैग, जूते और कपड़े रखे थे. 

यह हमला हाल ही में ईरान के मिनाब क्षेत्र में हुआ था. एक ऐसी घटना जिसे तेहरान अमेरिका-इजरायल का हमला बताता है और जिसके वजह से कई स्कूली बच्चों की जान चली गई थी. इस विजुअल स्टेटमेंट के माध्यम से ईरान यह संदेश देना चाहता था कि वह बातचीत की मेज पर केवल एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में ही नहीं आ रहा है, बल्कि अपने उन निर्दोष नागरिकों के दुख के साथ आ रहा है, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान की कीमत चुकाई है.

अमेरिका की ओर से कौन-कौन हो रहा शामिल?

इस बीच उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा रहा है. इस समूह में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, साथ ही उनके दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं.  अमेरिकी वार्ताकारों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद विदेश विभाग और पेंटागन के विशेषज्ञ भी हैं. 

ईरान की ओर क्या कहा गया?

ईरान की एक समाचार एजेंसी ने बताया कि बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक पहले से तय की गई पूर्व-शर्तें पूरी नहीं हो जातीं. यह रुख गालिबफ द्वारा इस्लामाबाद के लिए रवाना होने से पहले 'X' पर पोस्ट किए गए एक संदेश से मेल खाता है.

'X' पर गालिबफ ने कहा, 'दोनों पक्षों द्वारा आपसी सहमति से तय किए गए दो कदम अभी तक लागू नहीं किए गए हैं. लेबनान में संघर्ष-विराम और बातचीत शुरू होने से पहले ईरानी संपत्तियों पर लगी पाबंदियों को हटाना.'