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अफगानिस्तान की यूनिवर्सिटी पर पाकिस्तान ने दागा रॉकेट, 4 की मौत; बच्चों समेत कई लोग घायल

अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी सेना पर पूर्वी कुनार प्रांत में घातक मोर्टार और रॉकेट हमलों के जरिए नागरिकों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है. इस हमले में 4 बेगुनाहों की मौत हुई है और 70 अन्य घायल हुए हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमावर्ती तनाव ने एक बार फिर हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है. काबुल ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन कर कुनार प्रांत के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया है. सोमवार दोपहर को हुई इस भारी गोलाबारी ने न केवल मासूमों की जान ली, बल्कि महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों को भी मलबे में तब्दील कर दिया. इस घटना ने दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच कूटनीतिक दरार को और भी ज्यादा गहरा कर दिया है.

पाकिस्तानी सेना ने सोमवार दोपहर करीब दो बजे बिना किसी चेतावनी के अचानक हमला बोल दिया. कुनार प्रांत की प्रांतीय राजधानी असदाबाद और मनोगई जिला इस सैन्य गोलाबारी का मुख्य केंद्र बने. सरहद पार से दागे गए घातक मोर्टार और रॉकेट सीधे मासूम नागरिकों के रिहायशी ठिकानों पर जाकर गिरे, जिससे चारों तरफ चीख-पुकार मच गई. इस अप्रत्याशित सैन्य हमले में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. गोलाबारी इतनी तीव्र थी कि स्थानीय लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला.

विश्वविद्यालय और छात्रों पर सीधा निशाना 

इस सैन्य कार्रवाई की सबसे दर्दनाक तस्वीर सैयद जमालुद्दीन विश्वविद्यालय से सामने आई है. जब रॉकेट परिसर में गिरे, तब कई छात्र अपनी कक्षाओं में पढ़ाई में व्यस्त थे. इस हमले में करीब 30 छात्र बुरी तरह लहूलुहान हो गए. किसी विद्या के मंदिर को इस तरह निशाना बनाना अफगान समाज के लिए गहरे जख्म की तरह है. कुल 70 घायलों को तत्काल एम्बुलेंस के जरिए अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है. डॉक्टरों के अनुसार कई छात्रों की स्थिति अभी काफी ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है.

महिलाओं और बच्चों की मार्मिक स्थिति 

घायलों की लंबी सूची में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं और नन्हे बच्चे भी शामिल हैं. असदाबाद की शांतिपूर्ण गलियों में गिरे मोर्टार के गोलों ने कई जिंदगियां हमेशा के लिए उजाड़ दी हैं. लुक्मान-स्पिन बोल्डक जैसे शांत क्षेत्रों में भी पाकिस्तान की ओर से इसी तरह की हिंसक गोलाबारी की खबरें मिली हैं. मानवीय आधार पर यह हमला पूरी तरह निंदनीय है क्योंकि इसका निशाना वे मासूम बने जो किसी भी तरह के सैन्य या राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा नहीं थे.

अफगान सरकार का तीखा विरोध 

अफगान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने सोमवार को पाकिस्तानी सेना की इस हरकत को घोर 'युद्ध अपराध' और क्रूरता करार दिया है. काबुल ने वैश्विक मंच पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नागरिकों और शैक्षणिक संस्थानों पर बमबारी करना पाकिस्तान की हिंसक मानसिकता को दर्शाता है. सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पुरजोर अपील की है कि वे इस उकसावे वाली कार्रवाई का कड़ा संज्ञान लें. प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि इस तरह के अमानवीय कृत्यों को कभी माफ नहीं किया जाएगा.

मध्यस्थता का ढोंग और खूनी खेल 

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में पाकिस्तान का दोहरा और खतरनाक चेहरा खुलकर सामने आ गया है. एक तरफ वह अमेरिका और ईरान के बीच शांति दूत बनने का स्वांग रच रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके सैनिक अफगानिस्तान में मासूमों का खून बहा रहे हैं. मध्यस्थता की बातों के बीच इस तरह का खूनी खेल खेलना उसकी कूटनीतिक विश्वसनीयता को खत्म करता है. निर्दोष बच्चों पर रॉकेट बरसाना यह साबित करता है कि पाकिस्तान की शांति की बातें केवल दुनिया को गुमराह करने का एक मुखौटा हैं.