नेपाल त्रासदी: कहां तुम चले गए.... हाथों में अपनों की तस्वीरें, आंखों में उम्मीद; अस्पतालों में परिजनों को तलाशते लोग

नेपाल में बाढ़ और आपदा के बाद अस्पतालों के बाहर दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. गुरुवार को सैकड़ों लोग हाथों में अपने परिजनों की तस्वीरें लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे.

@DrMalko
Reepu Kumari

नई दिल्ली: नेपाल में बाढ़ की तबाही ने कई परिवारों को ऐसी बेचैनी में डाल दिया है, जिसका अंत उन्हें दिखाई नहीं दे रहा. गुरुवार को अस्पतालों के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें लिए घंटों खड़े रहे. किसी के हाथ में फोटो थी तो किसी के पास अपने परिवार के सदस्य का मोबाइल नंबर और पता. हर आने जाने वाले से एक ही उम्मीद थी कि शायद कोई उनके अपने की खबर दे दे.

रसुवा और नेपाल के मध्य हिस्सों में आई बाढ़ का असर त्रिशुली और नारायणी नदी प्रणालियों के आसपास भी दिखाई दिया. बुधवार सुबह से कई लोग अपने परिजनों के संपर्क में नहीं हैं. इसी बीच अस्पतालों में घायलों और बचाए गए लोगों की सूचियां लगाई गईं. परिवार इन्हीं सूचियों में अपनों के नाम तलाश रहे हैं. दूसरी ओर, नदी और निचले इलाकों में लापता लोगों की खोज लगातार जारी है.

तस्वीरों में तलाशते रहे अपने

काठमांडू पोस्ट के अनुसार, महाराजगंज स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में सैकड़ों लोग अपने रिश्तेदारों की तलाश में पहुंचे. कई परिवारों ने लापता लोगों की तस्वीरें बोर्ड पर लगाईं. इन तस्वीरों के साथ पते और मोबाइल नंबर भी लिखे गए, ताकि किसी को उनके बारे में जानकारी मिले तो परिवार तक खबर पहुंच सके. अस्पतालों के बाहर इंतजार कर रहे लोगों के लिए हर सूचना उम्मीद की एक नई वजह बनी हुई थी.


अस्पतालों में बढ़ता दबाव

प्रशासन को त्रिशुली और नारायणी नदियों से निकाले गए शवों की बढ़ती संख्या से भी जूझना पड़ा. भैरवपुर अस्पताल के शवगृह में जगह खत्म होने की सूचना मिली. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, पड़ोसी तनहुं में मिले नौ शवों को जिले में वापस भेजा गया, क्योंकि भैरवपुर की सुविधा में उनके लिए पर्याप्त जगह नहीं थी. इस स्थिति ने आपदा के बाद अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को और स्पष्ट कर दिया.

लिस्ट में खोज रहे लापता परिजन

अस्पतालों में भर्ती लोगों की सूचियां प्रशासन ने सार्वजनिक कीं, ताकि रिश्तेदार यह पता लगा सकें कि उनके अपने बचाए गए लोगों में शामिल हैं या इलाज करा रहे हैं. मृतकों की तस्वीरें भी अस्पताल में प्रदर्शित की गईं. इसके अलावा अधिकारियों ने लापता लोगों के नाम और दूसरे जरूरी विवरण दर्ज करने के लिए अलग डेस्क बनाए. परिवार इन केंद्रों पर पहुंचकर अपने लापता परिजनों से जुड़ी कोई भी जानकारी जुटाने की कोशिश करते रहे.

घायलों से भरे आपातकालीन वार्ड

आपदा के बाद कई अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है. नेपाल के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के अलावा नुवाकोट का त्रिशुली अस्पताल और काठमांडू का बिर अस्पताल भी घायलों का इलाज कर रहे हैं. अस्पतालों के आपातकालीन वार्ड मरीजों से भरे हुए हैं. एक ओर डॉक्टर घायलों के उपचार में जुटे हैं, तो दूसरी ओर बाहर खड़े परिजन लापता लोगों की जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

राष्ट्रीय ट्रामा सेंटर के बाहर भी वही दर्द

काठमांडू के राष्ट्रीय ट्रामा सेंटर के बाहर एक लापता व्यक्ति के रिश्तेदार ने अपने साले की तस्वीर का बोर्ड बनाकर लोगों को दिखाया. उसका मकसद केवल इतना था कि शायद किसी की नजर उस तस्वीर पर पड़े और उसके बारे में कोई जानकारी मिल सके. भैरवपुर अस्पताल में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे. अस्पतालों के बाहर तस्वीरें, नाम और मोबाइल नंबर लेकर खड़े लोग अपने अपनों की तलाश में लगातार भटकते रहे.