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India Daily

Nepal Flood: तबाही के बीच भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, 11 सदस्यीय टीम पहुंची नेपाल

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. शनिवार तक मृतकों की संख्या 626 पहुंच गई, जबकि 2,500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है.

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Edited By: Reepu Kumari
Nepal Flood: तबाही के बीच भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, 11 सदस्यीय टीम पहुंची नेपाल
Courtesy: @its_RajmaChawal

नई दिल्ली: नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है. शनिवार तक इस आपदा में 626 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ ने घरों के साथ सड़क, पुल और जलविद्युत ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है. दुर्गम इलाकों और खराब मौसम के बीच राहत दल लगातार शवों की तलाश और लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं. हर गुजरते घंटे के साथ चिंता बढ़ रही है.

नेपाल की मदद के लिए बड़ा कदम

बढ़ती तबाही के बीच भारत ने नेपाल की मदद के लिए बड़ा कदम उठाया है. नेपाली सरकार के अनुरोध पर 11 सदस्यीय भारतीय दल नेपाल पहुंच गया है. इस टीम में चिकित्सा कर्मी और सुरंग बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं. दल सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर राहत और बचाव अभियान में सहायता करेगा. वहीं, नेपाल ने विदेशी सहायता को सीमित रूप से मंजूरी देने के साथ भारत और चीन से बेली पुल बनाने में भी मदद मांगी है.

मौतों का आंकड़ा 626 तक पहुंचा

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार नेपाल के आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं. चितवन में सबसे ज्यादा 233 मौतें दर्ज हुईं. नवलपरासी पूर्व से 158, नुवाकोट से 51, गोरखा से 48, नवलपरासी पश्चिम से 47, धाडिंग से 45, तनहु से 31 और रसुवा से 13 शव मिले हैं. लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान लगातार चल रहा है.

भारत की टीम संभालेगी अहम जिम्मेदारी

नेपाल में बचाव अभियान को गति देने के लिए पहुंची भारतीय टीम प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन की मदद करेगी. 11 सदस्यीय दल में चिकित्सा कर्मियों के साथ सुरंग बचाव विशेषज्ञ भी हैं. इसका उद्देश्य मुश्किल इलाकों में चल रहे राहत कार्यों को अतिरिक्त विशेषज्ञता और सहायता देना है. नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत की यह मदद ऐसे समय पहुंची है, जब कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

हजारों लोगों की तलाश अभी बाकी

बाढ़ के बाद नेपाल और तिब्बत में करीब 2,500 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है. प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचना आसान नहीं है और मौसम भी बचाव अभियान में बाधा बन रहा है. बुधवार को रासुवा और मध्य नेपाल के दूसरे हिस्सों में आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया. बचाव दल मलबे और दुर्गम भूभाग के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं.

विदेशी मदद पर बदला नेपाल का रुख

नेपाल ने शनिवार को खोज और बचाव के लिए सीमित विदेशी सहायता स्वीकार करने पर सहमति जताई. इससे पहले सरकार का कहना था कि उसके अपने सुरक्षा बल और अधिकारी राहत कार्य संभालने में सक्षम हैं. लेकिन लापता विदेशी नागरिकों की संख्या और आपदा की गंभीरता बढ़ने के बाद रुख बदला गया. अब चुनिंदा क्षेत्रों में सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों को काम करने की अनुमति दी जाएगी.

भारत चीन से पुलों के लिए मांगी मदद

बाढ़ से कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है. इसे देखते हुए नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली पुलों के निर्माण में सहायता मांगी है. इन पुलों को अपेक्षाकृत तेजी से तैयार किया जा सकता है और इनके लिए भारी मशीनरी की जरूरत भी कम होती है. दूरदराज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क बहाल करने के लिए ऐसे पुल महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

हिमखंड टूटने से आई विनाशकारी बाढ़

26 अगस्त की बाढ़ को सामान्य मानसूनी बारिश के बजाय हिमालय में हिमखंड और चट्टानों के बड़े हिस्से के ढहने से जोड़ा गया है. नेपाल चीन सीमा के पास हुए इस घटनाक्रम से लेंडे खोला नदी में बर्फ और चट्टानों का भारी प्रवाह आया. मलबा भोटे कोशी नदी में पहुंचा और तेज बाढ़ ने रसुवा समेत निचले क्षेत्रों को प्रभावित किया. इससे अस्थायी झीलें भी बनीं, जिनके प्राकृतिक अवरोध टूटने पर दोबारा बाढ़ का खतरा बताया गया है.