नई दिल्ली: दुनिया के सबसे ताकतवर सैन्य गठबंधन NATO पर आज सवालिया निशान लग गया है. ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में यूरोपीय देशों ने अमेरिका से दूरी बना ली है. इटली और स्पेन जैसे देशों ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने एयरस्पेस और ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने से साफ मना कर दिया.
इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सख्त बयान दिया है कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद NATO के साथ अमेरिका के संबंधों की पूरी समीक्षा और पुनर्विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर सहयोगी देश अमेरिका के हितों की रक्षा में साथ नहीं देते तो गठबंधन का कोई मतलब नहीं रह जाता. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से NATO की आलोचना करते आए हैं और अब यह दरार और गहरी होती दिख रही है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम में खुलकर अपनी निराशा जताई. उन्होंने कहा कि ईरान संघर्ष समाप्त होने के बाद अमेरिका को NATO की उपयोगिता पर फिर से विचार करना होगा. रुबियो ने स्वीकार किया कि पहले वे NATO के मजबूत समर्थक थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. अगर अमेरिका को अपने हितों की रक्षा के लिए NATO के ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं मिल रही है, तो गठबंधन सिर्फ एकतरफा रास्ता बनकर रह गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रंप ही लेंगे, लेकिन समीक्षा जरूरी हो गई है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से NATO सहयोगियों पर आरोप लगा रहे हैं कि वे रक्षा खर्च बहुत कम करते हैं और सुरक्षा का पूरा बोझ अमेरिका पर डालते हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ट्रंप ने सहयोगी देशों से अपील की कि वे होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए युद्धपोत भेजें. लेकिन कई देशों ने या तो मना कर दिया या सिर्फ अस्पष्ट वादे किए. ट्रंप ने फ्रांस, स्पेन और अन्य देशों को कायर कहते हुए चेतावनी दी कि अगर मदद नहीं की गई तो NATO का भविष्य बहुत बुरा होगा. ट्रुथ सोशल पर उन्होंने साफ लिखा कि अमेरिका सदैव यूरोप की रक्षा करता है, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिलता.
हाल ही में इटली ने एक अमेरिकी कॉम्बैट विमान को अपने यहां लैंड करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया. ठीक एक दिन पहले स्पेन ने ईरान अभियान में शामिल अमेरिकी विमानों के लिए अपना पूरा एयरस्पेस बंद कर दिया. इन फैसलों ने अमेरिका में गुस्सा बढ़ा दिया है. रुबियो ने सवाल उठाया कि जब सिर्फ ठिकानों और एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जाती है और जवाब 'नहीं' आता है, तो फिर NATO में रहने का क्या मतलब है? उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका सहयोगियों से हवाई हमले करने को नहीं कह रहा, सिर्फ बुनियादी सहयोग मांग रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान संकट ने NATO की कमजोरियां खुलकर सामने ला दी हैं. Article 5 की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं. यूरोप में चिंता है कि अमेरिका गठबंधन से दूरी बना सकता है. रुबियो के बयान से साफ है कि युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका NATO के साथ अपने रिश्तों पर गंभीरता से विचार करेगा. अगर सहयोगी देश अपना रुख नहीं बदलते तो दुनिया का सबसे पावरफुल गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच सकता है.