सत्तारूढ़ श्रीलंका पोडुजना पेरामुना ने आगामी राष्ट्रपति चुनावों में नमल राजपक्षे को मैदान में उतारने का फैसला लिया है. आज इस फैसले पर औपचारिक घोषणा की उम्मीद है, यह फैसला ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुई है जब पार्टी और देश अभी भी आर्थिक संकट और अराजकता के प्रभावों से जूझ रहे हैं.
दरअसल 21 सिंतबर को श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है. साल 2022 के जन विद्रोह के बाद यह पहला चुनाव है, जिसमें राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को अपदस्थ कर दिया गया था. इस चुनाव में चारों ओर से मुकाबला होने की संभावना है. मौजूदा राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे का मुकाबला समागी जन बालवेगया के सजित प्रेमदासा और जनता विमुक्ति पेरामुना के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके से होगा.
नमल राजपक्षे को मैदान में उतारने का फैसला तब सामने आया जब एसएलपीपी उम्मीदवार एमपी धम्मिका परेरा ने पार्टी को बताया कि वह व्यक्तिगत कारणों से 2024 का राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ेंगे. एसएलपीपी के एक शीर्ष सूत्र ने बताया कि नमल ने अपनी मर्जी से चुनाव लड़ने की पेशकश की जिसे पार्टी ने देर रात हुई बैठक में समर्थन किया है.
पिछले हफ्ता एसएलपीपी के कई संसदीय समूहों ने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे का समर्थन किया, उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार को मैदान में उतारने की बात कही, विक्रमसिंघे का समर्थन करने वाले सांसदों के बारे में पूछे जाने पर पार्टी नेता ने कहा, एसएलपीपी के वे युवा सांसद जिन्होंने रानिल विक्रमसिंघे की उम्मीदवारी का समर्थन किया था, अब नमल का समर्थन करेंगे."
नमल महिंदा राजपक्षे के सबसे बड़े बेटे हैं, जिन्हें श्रीलंका के इतिहास में सबसे लोकप्रिय सिंहली बौद्ध नेता के रूप में देखा जाता है. नमल लगभग एक दशक से धीरे-धीरे अपनी टीम का निर्माण कर रहे हैं, दक्षिण और पूर्व दोनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और तमिल बहुल उत्तरी श्रीलंका में स्थायी रूप से तैनात और दौरा कर रहे हैं, जिससे तमिल आबादी के साथ उनका सीधा जुड़ाव बढ़ रहा है.
नमल ने 2010 के संसदीय चुनाव में हंबनटोटा जिले में यूनाइटेड पीपुल्स फ़्रीडम अलायंस के उम्मीदवारों में से एक के रूप में चुनाव लड़ा और संसद के लिए चुने गए. उनके पिता महिंदा 2005 में राष्ट्रपति बनने से पहले 16 साल तक हंबनटोटा से सांसद रहे.